लकड़ी का बुरादा
नारियों के अरमानगिर जाते हैं कट कट करजैसे लकड़ी का बुरादा,गिरता रहता है कट कट बिना दर्द,थोड़ी बड़ी क्या हुई
Read Moreनारियों के अरमानगिर जाते हैं कट कट करजैसे लकड़ी का बुरादा,गिरता रहता है कट कट बिना दर्द,थोड़ी बड़ी क्या हुई
Read Moreयहां झूठ का बोलबाला हैसच्चाई की होती हार हैमानवता जहां नष्ट होती हैयह कलयुग ही तो है रिश्तें का कोई
Read Moreसदियों से जुल्म सहे हैंवो बदस्तूर अभी भी है जारीअपने वजूद की तलाश मेंक्यों भटक रही है अभी भी नारी
Read Moreन जाने वह यह सबकर लेती थी कैसे?तंगी भरे दिनों में भीरख कंधे पर हाथनिकाल देती थी पैसे। देखता रहता
Read Moreतन्हाई में लिपटी हुई मैं करती बस याद तुम्हें बांध लिया तुमने मुझको है एहसासों जाल मेंबीत जाती है रातें
Read Moreजटिल बंदिशें साहस से तोड़ रही है वो,वक्त को रफ्तार से पीछे छोड़ रही है वो,भयंकर तूफानों को आंख दिखा
Read Moreवक्त की रफ्तार है बड़ी तेजलेकिन वक्त हमारा बदल रहा नहीं!दिन महीने साल गुजर रहेलेकिन खुशियां न मेरे हाथ लगी!अनन्त
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