घर
घरतब ही घर बन पाता हैजब उसमेंदीवारें होंजो रोकती होंनिन्दा का अविरल प्रवाहदरवाजा होजो स्वागत करेमेहमान कारसोई होजहाँ बने स्नेहशिक्त
Read Moreजगन्नाथ धाम पुरी की धरती,भक्ति जहाँ हर श्वास में भरती।शंख-नाद से गूँज उठे आकाश,हर कण में बसता प्रभु का वास।मंदिरों
Read Moreमन की चाह एक हैआसमां में तारे अनेक हैपूरा करने चाहत कोदेखो टूटता तारा एक है खुद को समेटे जैसे
Read Moreसियासत अब सियासत नहीं रहीरोम रोम में उनके तिजारत भरी रही। वे अवाम को देखते हैं हिकारत सेवोट लेकर, कुर्सी
Read Moreये हैं त्याग की गाथा, दर्द की कहानी,आज भी सुनाती है हर इक निशानी।कैसे सलीब पे यूं लटके प्रेम के
Read Moreतेज़ धूप का आलम देखो, न साया है न राहत है,हवाएं गरम हैं कितनी, उफ़ कैसे उड़ते फिरते हैं।उनके नन्हे
Read Moreमुझे कुछ कहना है,कि मुझे कुछ नहीं कहना है।अब आप बताओ-कि आपको क्या और क्यों सुनना है?बड़े अजीब हो आपमेरा
Read Moreकिसने माँगा स्वर्ण सिंहासन,किसने वन का शोक,त्याग तिलक बन जगमगाया,मिट गया सब लोक-विलोक। मौन पथिक था जो चला,आँसू संग विश्वास,वही
Read Moreशान्ति का पथ धार लो। जीव करुणा तार लो।। नेह से विस्तार हो। सौख्य धुन संस्कार हो।। भाव समता हो
Read Moreकभी घूंघट,कभी बुर्के के पीछे मैं छिपती गई,तुमने जिस मर्यादा में रखा उसमें मैं सिमटती गई। अपने प्रेम और त्याग
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