सावन को आने दो
दिनकर की स्वर्णिम किरणों ने,धरती का सुंदर रूप सजाया ,काले मेघो ने सूरज के संगआँख मिचोली खेल रचाया,अब तो रिम
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Read Moreधड़ाधड़ बिकने की इस बेला मेंआप याद बहुत आते हो मान्यवर,आपके विचारों पर अडिग रहने की कलासदियों तक रहेगा अजर
Read Moreसमुद्री लहरों से लड़ते-लड़ते,जीवन जिनका यूं बीत गया।इस देश की साँसें चलती रहीं,उनका नाम कहाँ पे खो गया। वे सीमा
Read Moreआसान नहीं होताछुट्टियों के बादबच्चों को वापस विदा करना ।साथ ले जाते हैं वेसारी खिल-खिलाहट,मुस्कुराहट और खुशबू ।ले जाते हैं
Read Moreअनजान ‘शहर’ की गलियों में,मैं खुद को ढूँढता फिर रहा हूँ।हरेक चेहरा लगता अपना-सा,फिर भी ‘तन्हा-तन्हा’ रहता हूँ। यहाँ पर
Read Moreक्यों मन मलिन उदास सखे,याद किसी की आई है?बैठे हो सरि के कूल परदखे किसकी परछाई है? क्यों चौंक मुड़े
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