रोला छंद
अपना करो विकास, करो जमकर मनमानी। ऐसा हुआ समाज, सुनें हम आप कहानी।।पहले भरना जेब, देश की पीछे छोड़ो।निहित स्वार्थ में
Read Moreआज प्राथमिकताओं के आगे रिश्ते कहाँ हैं टिकतेअनमोल जो होते थे कभी आज कौड़ियों के भाव हैं बिकतेकभी रिश्तों में
Read Moreआज पेट्रोल बोला, “भाई इथेनॉल,यूं आजा कर लें थोड़ा-सा धमाल।”सोचते इथेनॉल बोला, “ठीक है यार,अब तो मैं भी हूँ सरकार
Read Moreसंघर्षों को तू भी भूल गया,मैं भी भूल गया,जिनकी उम्मीदों पर था भरोसा,उसी ने दिया शूल नया। तू भी जीए
Read Moreजब कुछ टूट जाता है ..पीछे छूट जाता हैफिर सब पहले जैसा नहीं रहताएक दरार रह जाती हैंजो भर भी
Read Moreमौन की भाषा में जीवन का सारा ज्ञान समाया हैहर रिश्ते का अपना मर्यादित सम्मान निभाया हैजिसको जितना देना हो,पहले
Read Moreकवित्त – 1. आगमनघन घुमड़ घुमड़ आए, दामिन दमके अम्बर,पवन बहे पुरवाई, महके चंदन का कंवर।धरती ने ओढ़ी हरियाली, पहने
Read Moreचाहने से हर ख़्वाब,तक़दीर का हिस्सा नहीं होता,हर मुस्कान के पीछे,ख़ुशियों का किस्सा नहीं होता।दिल तो चाहता है,हर मंज़िल कदमों
Read More