आवरण
कविताएँ महज शब्द नहीं, एक आवरण हैं,परिधान है वो, जो ओढ़ती लेखनी है।यह तो भावों का आचमन, एक समर्पण है,इसे
Read Moreशब्द कभी केवल शब्द नहीं होते,वे समय के दस्तावेज होते हैं,जो लिखे जाते हैंसदियों की चुप्पियों के बीच,और पढ़े जाते
Read Moreजीवन का भी अजीब खेला है,बस दो दिनों का मेला है।सब माया मोह का जाल है,सबका भ्रम में जीने से
Read Moreबाल श्रम निषेध दिवस मनाएँ या न मनाएँ पर यदि कल सँवारना है तो आज बच्चों का बचपन
Read Moreचुनाव का मौसम आया, गलियों में शोर उठा,हर दीवार पर चेहरा नया, हर वादा फिर से सजा।भाषणों की बारिश में,
Read Moreपेड़ों से हरियाली है, और धरती का श्रृंगार हैचलो इसको सजाएं, आएगी इससे बहार है। हरियाली जरूरी है, इसी से
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