जन्मदिन की आत्मव्यथा
आज जीवन का एक और वर्षशांत स्वर में मुझसे कह गया—मानव जन्म साधारण नहीं होता,यह ईश्वर का अनुपम वरदान है।
Read Moreआज जीवन का एक और वर्षशांत स्वर में मुझसे कह गया—मानव जन्म साधारण नहीं होता,यह ईश्वर का अनुपम वरदान है।
Read Moreवो गांव से शहर आयीबड़ी मिन्नत और जीत से आयीबड़े मकान ,छोटा सा कमराउस कमरे के कोने मेंअपनी जगह बनायी
Read Moreआज फिर वही रस, वही तृप्ति,युगों बाद जागी वह सुवास,या कोई गुप्त रहस्य छिपा है,जिसकी लगी रहती है आस। कतिपय
Read Moreपुरुषोत्तम मास आया है, भक्ति का उपहार,हरि स्मरण से भर उठे, सारा जीवन संसार।अधिक मास कहलाता, पुण्य महीना खास,जप-तप, दान
Read Moreगधे को गधा मत बोलो,वह भी प्यार का हकदार है,उसकी भी अपनी दुनिया,उसकी अपनी सरकार है। इज्जत अगर न दोगे
Read Moreइस प्राकृति को इंसानों नेबहुत धोखा दिया हैं!वरना ये आसमां टूट करबे मौषम नही बरसते!गर्मी बस शुरुआत हुई,की लोग हाय
Read Moreआज वृद्ध माँ की मन, देर रात तकबहुत कचोटती रही,जो सदैव सूत की चाह किये।बेटी की उपेक्षाऔर कुलदीपक की इच्छा
Read Moreसंस्था हित नहीं झगड़े हैं,सब के आपस के झगड़े हैं,यह कोई अफवाह नहीं,संस्था हित परवाह नहीं, मूल बात कुछ और
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