सड़क सुरक्षा केवल नियमों से संभव नहीं
भारत में सड़क दुर्घटनाएँ अब केवल यातायात व्यवस्था की समस्या नहीं रह गई हैं। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, प्रशासनिक क्षमता, शहरी
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Read More“चंदा मामा दूर के, पुए पकाएँ बूर के”—बचपन की दुनिया में शायद ही कोई ऐसी लोरी हो, जिससे भारतीय पीढ़ियों
Read Moreआप दीप जलाते हैं या नहीं जलाते, यह आपका व्यक्तिगत निर्णय है। किसी धार्मिक परंपरा को मानना, उससे दूरी रखना
Read Moreसेवानिवृत्ति सामान्यतः वह घड़ी है, जब आदमी अपनी उपलब्धियों का हिसाब करता है और आगे के जीवन की सुविधाओं की
Read Moreज़िंदगी वाक़ई एक ऐसा अनसुना सफ़र है, जिसका न कोई तयशुदा नक़्शा है और न ही यह मालूम है कि
Read Moreमानवीय जीवन की वास्तविक खूबसूरती केवल भौतिक उपलब्धियों, ऊँचे पदों, धन-दौलत और आधुनिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि उन मानवीय मूल्यों
Read Moreलोग अक्सर यह समझते हैं कि इश्क़ सिर्फ़ वादों की छांव में, क़समें खाने में और साथ उम्र बिताने के
Read Moreसोशल मीडिया मंचों पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रसार को लेकर केंद्र सरकार के कड़े रुख
Read More“तुमने अभी देखा ही क्या है??”—यह महज़ एक सवाल नहीं, बल्कि एक तर्जुमा है उस लंबी और कठिन यात्रा का
Read Moreपिछले एक दशक में भारत में विवाह को लेकर जो आंकड़े आए हैं, वे व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि बड़े प्रामाणिक
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