दिल सूअर का … (व्यंग्य)
जब भी कोई आज के विज्ञान की उन्नति की बात करता है तो उसकी बात काटने को कोई ना कोई
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Read Moreयूँ तो जीव-प्रेम के लिए पूरा शहर जे पी को बखूबी जानता था। उन्हें गली-मोहल्ले, यहाँ-वहाँ, कहीं
Read Moreउस दिन आफिस की डाक देखते-देखते अचानक एक शिकायतनुमा पत्र पर मेरी नजर ठहर गयी! उसे एक ही झटके में
Read Moreदेश के इतिहास में एक समय ऐसा भी था,जो घोषित चारण – युग था। इसके विपरीत आज अघोषित चारण-युग है।
Read Moreदृश्य-1 मैं शहर हूँ।मुझे नगर अथवा सिटी भी कहा जाता है।बहुत बड़ा होने पर महानगर (मेट्रोपोलिटन सिटी) कह दिया जाता
Read Moreबचपन में किसी क्लास में पढ़ा था ” पढ़ लिख कर मैं एक किसान बनूंगा ” शायद तब देश में
Read Moreकिसान आन्दोलन के नेताओं को रंज है कि एक वर्ष से भी अधिक चले इस आन्दोलन में 700 किसानों का
Read Moreबहुत दिनों बाद आज कुछ सोचते सोचते अच्छी नींद आ गई।जब नींद अच्छी हो तो सपने का आना तो तय
Read Moreआदमी सबकुछ बन सकता है, सिवाय ‘आदमी’ बनने के ! ‘चंद्रकांता’ की तरह उपन्यास लिखने हेतु एक प्रकाशक ने 37
Read More‘सावन के अंधे को सब हरा – ही- हरा दिखाई देता है’। यह कहावत आज- कल से नहीं प्राचीन काल
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