Monthly Archives: February 2015

  • एक झीना सा आवरण

    एक झीना सा आवरण

      बिना किये तुम्हारा  दर्शन सूनी लगती हैं धरती सूना लगता हैं अंबर माना की तुम मेरे लिये सिर्फ एक ख्याल हो वैसे भी जीवन भी तो हैं एक सपन कितना भी चाहों दूरी बनी ही रहती हैं...

  • यशोदानंदन-११

    कंस तो कंस था। वह पाषाण की तरह देवी देवकी की याचना सुनता रहा, पर तनिक भी प्रभावित नहीं हुआ। देवी देवकी ने कन्या को अपनी गोद में छिपाकर आंचल से ढंक दिया था, परन्तु कंस...




  • कविता

    कविता

    चार छंदों में विचार कविता नए युग का नवद्वार कविता प्राण प्राण बहती है हर मन ये कहती है शब्द स्वर तो शब्दों की झंकार कविता प्रियतम की बात हो या विरह भरी रात हो भूखी...


  • ग़ज़ल : होली आई है

    ग़ज़ल : होली आई है

    उड़े अबीर-गुलाल कि होली आई है. करते रंग कमाल कि होली आई है. भाँग छानकर हुए रवाना झाँसी वो, पहुँच गए भोपाल कि होली आई है. बच्चों को हम क्या समझाए ऐसे में, बाबा करें धमाल...


  • हाइकु

    हाइकु

    1 मिटती पीड़ा मिलते स्नेही-स्पर्श ओस उम्र सी । 2 ईर्षा वाग्दण्ड रिश्तो में डाले गांठ टूटे धागा सी 3 उलझा रिश्ता सुलझाये वागीश ऊन लच्छा सा 4 स्नेह की थापी बुझती वाड़वाग्नि मृतवत्सा की। 5...