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  • किसे कहूँ खुशी

    किसे कहूँ खुशी

    ज़िंदगी रोज एक पन्ना पलटकर आगे बढ़ जाती है,लेकिन जब पिछले पन्ने पलटो तो कुछ ऐसे यादगार पल नज़र आ जाते हैं कि वापस उन्हें जी लेने की ललक पैदा हो जाती है। कुछ ऐसा ही...

  • आखिर मैं हूँ ऐसी क्यों?

    आखिर मैं हूँ ऐसी क्यों?

    मैं कैसे भूलूँ वो सपना? जो हो न सका कभी अपना आखिर मैं हूँ ऐसी क्यों? मैं हुई नहीं उस जैसी क्यों? मैं बुद्धिवान और क्षमतावान पर क्यों न हुई मैं शक्तिवान? मैं क्यों अपनों में...

  • रजिस्ट्री

    रजिस्ट्री

    माइग्रेन का दर्द रह-रह कर उठता था,डर लगता था कहीं बेहोश न हो जाय। अभी तो काफी लम्बा रास्ता है कहीं गिर गयी तो ! सोचा था कि गाड़ी से आउंगी पर ऐन वक्त पे ड्राईवर...

  • मुनाफा

    मुनाफा

    एक हाथ में बकरी की रस्सी पकड़े,दूसरे हाथ में चश्मे का केस,टेंपो को जोर जोर से आवाज दे रहीं थीं ।उम्र कोई 65 साल रही होगी।नाटा कद,गोल चेहरा,गोरा रंग साथ ही चेहरे पर पड़ी झुर्रियां उम्र...

  • कीमियागर कौन

    कीमियागर कौन

    अलकेमिस्ट यानी कीमियागर, कीमियागर उसे कहते हैं जो पत्थर को सोने में तब्दील करने की कला जानता हो।बार बार मन में ख्याल आता है कि सोने में ऐसा क्या है कि वो मूल्यवान है? न तो...

  • वन महोत्सव

    वन महोत्सव

    मौका था वन महोत्सव का,आयोजन विद्यालय परिसर के प्रांगण में होना था।कार्यक्रम का उद्घाटन करने माननीय मंत्री महोदय पधारने वाले थे।तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं।कार्यक्रम के लिए एक बड़े पांडाल की व्यवस्था होनी थी।चूंकि बरसात...

  • बेटी हूँ या भूल

    बेटी हूँ या भूल

    जिस दिन मेरा जन्म हुआ तुम, फूट फूट क्यों रोई माँ क्या सपनों की माला टूटी, जो तुमने पिरोई माँ जब मैं तेरी कोख में थी , तू कितना प्यार लुटाती थी जब से तेरी गोद...

  • नये साल का सपना

    नये साल का सपना

    साल बदल जाये तो क्या , समय न अभी भी बदला है पूस माघ में छुटकू के तन पर, अब भी फटा ही झबला है कब वो दिन आएगा जब, कहेंगे अब युग बदला है हर...


  • कविता : पापा

    कविता : पापा

    मेरे नन्हें से हाथों ने बड़ी जोर से थामा था लगता था मेरी मुट्ठी में तब सारा जमाना था बाजार की भीड़ में भी चलते चले जाना था पसंद की हर चीज को बस थैले में...