कविता

माँ

वो तब से हमें महसूस करती है, जब खुद का भी अहसास नहीं था.. वो तब से हमारा पेट भरती है, जब भूख का भी आभास नहीं था.. वो तब से हमारी धड़कन सुनती है, जब दिल भी हमारे पास नहीं था.. वो तब से हमारे लिए जीती है, जब जीने का उल्लास नहीं था.. […]

कहानी

नशा

आज ननकू बड़ी उहापोह में है । बस लगातार यही सोच रहा है और उस घड़ी को कोस रहा है …जाने क्यूँ मैं इस केस का गवाह बन गया । पर वह आखिर करता क्या उस समय स्थिति ही ऐसी बन गयी थी कि लगा था बस अब ज़िन्दगी बदल जाएगी । लेकिन उसे कहाँ […]

कहानी

किसे कहूँ खुशी

ज़िंदगी रोज एक पन्ना पलटकर आगे बढ़ जाती है,लेकिन जब पिछले पन्ने पलटो तो कुछ ऐसे यादगार पल नज़र आ जाते हैं कि वापस उन्हें जी लेने की ललक पैदा हो जाती है। कुछ ऐसा ही सोच रही थी सोमा | उसे याद आने लगा वो सब जब वो शिवम से मिली थी। डाकघर में […]

कविता

आखिर मैं हूँ ऐसी क्यों?

मैं कैसे भूलूँ वो सपना? जो हो न सका कभी अपना आखिर मैं हूँ ऐसी क्यों? मैं हुई नहीं उस जैसी क्यों? मैं बुद्धिवान और क्षमतावान पर क्यों न हुई मैं शक्तिवान? मैं क्यों अपनों में उलझी हूँ? फिर और भी मैं अनसुलझी हूँ मैं माँ की नहीं पिता की हूँ मैं अपनी नहीं पराई […]

कहानी

रजिस्ट्री

माइग्रेन का दर्द रह-रह कर उठता था,डर लगता था कहीं बेहोश न हो जाय। अभी तो काफी लम्बा रास्ता है कहीं गिर गयी तो ! सोचा था कि गाड़ी से आउंगी पर ऐन वक्त पे ड्राईवर धोखा दे गया ,कमबख्त को आज ही छुट्टी लेनी थी। आज ही आना भी जरूरी था क्योंकि रजिस्ट्री में […]

कहानी

मुनाफा

एक हाथ में बकरी की रस्सी पकड़े,दूसरे हाथ में चश्मे का केस,टेंपो को जोर जोर से आवाज दे रहीं थीं ।उम्र कोई 65 साल रही होगी।नाटा कद,गोल चेहरा,गोरा रंग साथ ही चेहरे पर पड़ी झुर्रियां उम्र की गिनती बयां कर रही थीं।कानों में चांदी की पुरानी घिसी बालियां देखकर लग रहा था कि जीवन की […]

सामाजिक

कीमियागर कौन

अलकेमिस्ट यानी कीमियागर, कीमियागर उसे कहते हैं जो पत्थर को सोने में तब्दील करने की कला जानता हो।बार बार मन में ख्याल आता है कि सोने में ऐसा क्या है कि वो मूल्यवान है? न तो उससे किसी का भूखा पेट भर सकता है न वो किसी की प्यास बुझा सकता है।क्यों हम किसानों को […]

लघुकथा

वन महोत्सव

मौका था वन महोत्सव का,आयोजन विद्यालय परिसर के प्रांगण में होना था।कार्यक्रम का उद्घाटन करने माननीय मंत्री महोदय पधारने वाले थे।तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं।कार्यक्रम के लिए एक बड़े पांडाल की व्यवस्था होनी थी।चूंकि बरसात का मौसम था इसलिए वाटरप्रूफ पांडाल लगना था।रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए बहुत दूर-दूर से कलाकारों को बुलाया गया […]

कविता

बेटी हूँ या भूल

जिस दिन मेरा जन्म हुआ तुम, फूट फूट क्यों रोई माँ क्या सपनों की माला टूटी, जो तुमने पिरोई माँ जब मैं तेरी कोख में थी , तू कितना प्यार लुटाती थी जब से तेरी गोद में आयी आँसू क्यों छलकाती है ढोल नगाड़े बजे नहीं माँ, न ही किन्नर गान हुआ क्यों इतना मातम […]

कविता

नये साल का सपना

साल बदल जाये तो क्या , समय न अभी भी बदला है पूस माघ में छुटकू के तन पर, अब भी फटा ही झबला है कब वो दिन आएगा जब, कहेंगे अब युग बदला है हर फूल का जीवन महके जब, हर तारा उजला उजला है नव वर्ष की पावन बेला पर, आओ हम संकल्प […]