कहानी

कहानी – मलंगी की मछलियां

मुसलाधार बारिश रात भर होती रही, शिवालिक पहाड़ियों के बीच बहती ब्यास के किनारे बसे गांव के लोग अभी अपने घरों के अंदर जकड़े थे। गांव नदी के किनारे कोई दो कोह के फासले पर बसा हुआ है, यह इकलौता गांव नहीं नदी के उद्गम से लेकर कई गांव बसे हैं । गांव की कुछ […]

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कहानी – गाइड

स्पेन के पर्यटकों का दल हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं की एक चोटी मून पीक को चढ़ने के लिए  रात के अंधेरे को चीरता हुआ धीरे -धीरे आगे बढ़ रहा था। इनमें एक नवयुवती जिसका नाम मर्सीडीज है, वह कोई तीन घंटे पहले एक चट्टान से फिसली थी और कोई बीस फुट तक फिसलती गई थी। उसके […]

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कहानी – कलाकार

वह अब हर रोज बगै़र कोई नागा किए आ रहा है। खुले मैदान में जहां से लोग उसके सामने से गुजरते,वहां पर वह अपना छोटा सा स्टूल रखता, एक स्टूल ठीक अपने सामने कोई 4-5 फुट पर रखता। अपनी पंेसिलों के बड़े प्यारे से बाक्स को एक ओर कपड़े पर रखता, एक ओर कुछ खास […]

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कहानी – चरागाहों के चोर

पहाड़ पर सर्दियों का मौसम आ चुका था। सर्दियों की शुरुआत में भरमौर गांव के एक गद्दी परिवार का भेड़ों का रेवड़ धौलाधार के इंद्राहर जोत से उतरने लगा। इन्हें हांकने वालों में सोमू, उसका बड़ा भाई लेखू, उनके दो घोड़े, दो गद्दी नस्ल के कुत्ते व मेमनों को उठाए लेखू का बड़ा लड़का मौखू […]

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कहानी : जिद्दी यात्री

”कौन हो तुम भाई! जो अंधेरे में इस उजाड़ रास्ते में भटक कर यहां आ गए हो”यात्री बोला, ”मैं एक परदेसी हूं, पर अपनी पहचान नहीं बता सकता क्योंकि मैं घर छोड़ कर इसलिए आया हूं कि मैं अपना सफर बिना किसी के पहचाने पूरा कर सकूं।’ ”क्यों आए हो यहां, यहां आगे रात के […]

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बांसुरीवाला

वह हर शाम को बगैर नागा किए ठीक उसी समय बांसुरी की मीठी तान छोड़ता जब गांव की लड़कियां, बच्चे या फिर बूढ़ी महिलाएं नीचे गहराई की घाटी से चढ़कर उस दिव्य पानी के चश्मे के इर्द-गिर्द आना शुरू हो जातीं। दिव्य चश्मे के सामने वाली ऊंची धार के बीच ही उसका छप्पर है। गांव […]

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कहानी – टापू वाला गांव

इस साल की बरसात पता नहीं अब क्या-क्या जुल्म ढाएगी। सीत्तू व ठुनिया अपने मचान के बाहर बड़ी मुश्किल से कुछ देर नदी को रोकने के साहस से बनी झील के फैलते प्रचंड रूप को देख कर हैरान थे और परेशानी की लकीरें उनके कसकुट रगों की त्वचा में खिंचती चली जा रही थी। उनकी […]

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कहानी – नदी के लुटेरे

जब ज्येष्ठ की धूप उनके जिस्मों के अंदर छुपी महीन जीवनदायनी खून के साथ घुली पानी की बूंदों को सोखनी शुरू कर देती, तो वे बड़े खुश होते, इसलिए नहीं कि शरीर का भार खाली हो रहा है, बल्कि इसलिए कि इस बार का सावन का अंधा घोड़ा उनके लिए कई नेमतें लाएगा। दूसरी ओर […]