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दहेज रूपी अमर बेल की जड़ें काटने का सही समय अब

………………………………………………………………… दहेज प्रथा भारतीय समाज में अमरबेल की भाँति इस तरह फैली कि इसने समाज के वट वृक्ष की सभी शाखाओं को न केवल आच्छादित कर लिया अपितु एक-एक शाखा की हरीतिमा को सोख लिया। लोलुप तर्कशास्त्रियों ने इसे संस्कृति में अंतर्निहित परंपरा मानने की दलीलें दीं औऱ कुछ ने समाज का अनिवार्य अंग मानकर […]

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कभी आया नही

तेरे घर मिलने कभी आया नहीं और तूने भी मुझको बुलाया नहीं दिल की बात तूने दिल में ही रखी दिल की बात मैंने भी बताया नहीं दिल तुझको ये अपना देकर सनम फिर दिल ये किसी से लगाया नहीं रात भर चाँद तारों से बातें करी बिन तेरे सपना मैंने सजाया नहीं याद आए […]

अन्य संस्मरण

कोरोना डायरी (कोरोना पर पहली डायरी)

दिसम्बर 2019 ●● मनुष्यों में जो रोगाणु और अब तो विषाणु एक-दूसरे-तीसरे-चौथे, फिर अनगिनत लोगों में प्रवेश कर दुनिया को हाहाकारी अवस्था में लाकर पटक दिए हैं, इस व्यथा-कथात्मक भ्रूण भले ही दशक पुरानी है, किंतु आरंभिक केस दिसम्बर 2019 में आयी, वो भी चीन के वुहान शहर से ! पता नहीं, चमगादड़ के जूठे […]

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एकांकी- “बुढ़ापा चाहता है अपनो का साथ”

चरित्र – 1- भानू प्रताप बेटा- मल्टीनेशनल कंपनी में डायरेक्टर 2-अमृता- भानू प्रताप की पत्नी (ब्यूटी पार्लर की मालकिन) 3-चाहत और चिंटू- दो बच्चे, चाहत – उम्र आठ वर्ष, चिंटू – उम्र बारह वर्ष 4- कमला- भानू प्रताप की माँ (उम्र 70 वर्ष)  पांच वर्ष पूर्व पति की मृत्यु हो चुकी है। कमला के पैरों में दर्द […]

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उन दिनों की बात

साथियों ! नमस्कार ! नेहा जी के अनुरोध पर विचार करते हुए यह तय किया कि कुछ मैं भी लिख दूँ । हालाँकि यह दिए गए विषय से कोसों दूर है लेकिन फिर भी लिखने का मकसद है कि नई पीढ़ी के लोगों को उन दिनों की सामाजिक मर्यादा , शुचिता व परंपराओं के बारे […]

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एक पत्र गाँधी के नाम

प्रिय बापू आप अमर थे! अमर हैं!और अमर रहेंगे! क्योंकि जो आपने कहा, जिया और गढ़ा, ‘सत्य ही ईश्वर है’ का जो मन्त्र आपने दिया और जो दूरदृष्टि आपके पास थी वो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। आशा ही नही वरन पूर्ण विश्वास है कि जगत गुरू शंकराचार्य ने ‘ब्रह्म सत्यम् जगत मिथ्या’ का […]

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प्रेम

प्रेम दुर्लभ नहीं प्रेम तो तपस्या है ।आप लिखिए और प्रेम में खो जाइये । प्रेम राधा है प्रेम कृष्ण है ,प्रेम ही तो सम्पूर्ण विश्व है ।प्रेम न हो तो दुनिया एक अंगार के समान होगी ।प्रेम से हम हैं प्रेम ही हमारी पहचान है ।जलते हुए दिलों का मरहम है ,रोते हुए आँसूओं […]

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चित् तरंगिणी का भव्य विमोचन ।

21/04/19 को उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय में युवा महोत्सव के अवसर पर हिन्दी और संस्कृत काव्य जगत में अपनी पहचान बना रही चित् तरंगिणी पत्रिका के द्वितीय अंक का विमोचन उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति देवी प्रसाद त्रिपाठी, निर्वाणी आखाडे के महामण्डलेश्वर स्वामी प्रेमानन्द जी महाराज, संस्कृत विश्वाविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं पतञ्जलि विश्वविद्यालय के वर्तमान […]

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तो फिर हमारा क्या होगा ?

(पर्दा खुलते ही किशोरीलाल के घर के हाल का दृश्य दिखाई देता है। मध्यम वर्ग का परिवार। हाल के दाहिनी ओर घर से बाहर जाने का रस्ता है , बाईं ओर घर के अंदर जाने का । उस के ठीक पीछे सुधीर और सोहन के कमरों में जाने के दरवाजे हैं। पीछे सोसाइटी की कामन […]

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अवसाद

जिंदगी भी कितने रंग बदलती है ।जब भी हम सोचते हैं कि सब कुछ अच्छा चल रहा है ,अचानक एक तेज आंधी आती है और सब कुछ बिखेरकर चली जाती है ,यही तो जिंदगी है ।हम कुछ देर के लिए भूल जाते हैं कि जब ये राम सीता ,राधा कृष्ण और शिव पार्वती के जीवन […]