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उन दिनों की बात

साथियों ! नमस्कार ! नेहा जी के अनुरोध पर विचार करते हुए यह तय किया कि कुछ मैं भी लिख दूँ । हालाँकि यह दिए गए विषय से कोसों दूर है लेकिन फिर भी लिखने का मकसद है कि नई पीढ़ी के लोगों को उन दिनों की सामाजिक मर्यादा , शुचिता व परंपराओं के बारे […]

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एक पत्र गाँधी के नाम

प्रिय बापू आप अमर थे! अमर हैं!और अमर रहेंगे! क्योंकि जो आपने कहा, जिया और गढ़ा, ‘सत्य ही ईश्वर है’ का जो मन्त्र आपने दिया और जो दूरदृष्टि आपके पास थी वो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। आशा ही नही वरन पूर्ण विश्वास है कि जगत गुरू शंकराचार्य ने ‘ब्रह्म सत्यम् जगत मिथ्या’ का […]

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प्रेम

प्रेम दुर्लभ नहीं प्रेम तो तपस्या है ।आप लिखिए और प्रेम में खो जाइये । प्रेम राधा है प्रेम कृष्ण है ,प्रेम ही तो सम्पूर्ण विश्व है ।प्रेम न हो तो दुनिया एक अंगार के समान होगी ।प्रेम से हम हैं प्रेम ही हमारी पहचान है ।जलते हुए दिलों का मरहम है ,रोते हुए आँसूओं […]

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चित् तरंगिणी का भव्य विमोचन ।

21/04/19 को उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय में युवा महोत्सव के अवसर पर हिन्दी और संस्कृत काव्य जगत में अपनी पहचान बना रही चित् तरंगिणी पत्रिका के द्वितीय अंक का विमोचन उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति देवी प्रसाद त्रिपाठी, निर्वाणी आखाडे के महामण्डलेश्वर स्वामी प्रेमानन्द जी महाराज, संस्कृत विश्वाविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं पतञ्जलि विश्वविद्यालय के वर्तमान […]

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तो फिर हमारा क्या होगा ?

(पर्दा खुलते ही किशोरीलाल के घर के हाल का दृश्य दिखाई देता है। मध्यम वर्ग का परिवार। हाल के दाहिनी ओर घर से बाहर जाने का रस्ता है , बाईं ओर घर के अंदर जाने का । उस के ठीक पीछे सुधीर और सोहन के कमरों में जाने के दरवाजे हैं। पीछे सोसाइटी की कामन […]

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अवसाद

जिंदगी भी कितने रंग बदलती है ।जब भी हम सोचते हैं कि सब कुछ अच्छा चल रहा है ,अचानक एक तेज आंधी आती है और सब कुछ बिखेरकर चली जाती है ,यही तो जिंदगी है ।हम कुछ देर के लिए भूल जाते हैं कि जब ये राम सीता ,राधा कृष्ण और शिव पार्वती के जीवन […]

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चिमनलाल चुटकुलेवाला

(पर्दा खुलने पर एक वृद्धाश्रम का दृश्य। वृद्वाश्रम के एक कमरे में शायर शंकरलाल, मास्टर मनीराम, लख्मीचंद और घनश्यामदास साहित्यिक गोष्ठी कर रहे हैं।) मनीराम – हां भाई शंकरलाल बोल आज तू क्या पढना चाहता है। शंकरलाल – मैं आज कविता पढंूगा। घनश्यामदास – जो भी घर से रूठता है कवि बन जाता है। (सब […]

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साहित्य अर्पण का कवि सम्मेलन 31 अगस्त को दिल्ली में

साहित्य अर्पण द्वारा नई दिल्ली स्थित गांधी आर्ट गैलरी में आयोजित कवि सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में, ये आयोजन अपने आप में एक अनूठा आयोजन होगा जिसमें कविता या गीत, ग़ज़ल ही नही बल्कि लघु कथा भी पढ़ी जा सकती है ! साहित्य अर्पण नाम ही बयान कर रहा है कि जो रॉइटर जिस […]

अन्य संस्मरण

राजनैतिक पराकाष्ठा व सूझबूझ के प्रतीक अटल जी

राजनैतिक पराकाष्ठा व सूझबूझ के प्रतीक अटल जी                 एक प्रखर वक्ता चिन्तक पत्रकार कवि के साथ-साथ देश के विरोधी दल के लम्बे समय तक ख्यातिलब्ध राजनेता  श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी का चला जाना भारत के लिए भारत की स्वस्थ राजनीति के लिए भारतीय साहित्य उसमें कविता की प्रखरता प्रभावोत्पादकता के लिए बहुत बड़ी […]

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एकांकी – अपना देश अपना शहर

पात्र परिचय स्नेहा – घर की बड़ी बहू 30 वर्ष स्मृति – घर की छोटी बहू 26 वर्ष रूपेश – स्नेहा का पति 32 वर्ष शंकर – स्मृति का पति 29 वर्ष (पर्दा खुलते ही एक मध्यम वर्ग के परिवार का दृश्य। घर की बड़ी बहू स्नेहा हाल में रखी चीजों को करीने से सजा […]