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बददिमागी कौन ?

आप किसकी और किस गुरुजी की बात करते हैं ? मैं कोई गुरुजी नहीं हूँ ! गुरुजी की परिभाषा बहुत वृहद है ।आपके छोटे भाई-बहन है ! अगर है, तो आपके माता-पिता को यह शोभा दिया कि हमारे पहले से जन्मे बच्चे भी हमारी हरकत को जान रहे होंगे ! कुर्सी पर सिर्फ विद्यालय में […]

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मानवता का संदेशवाहक मूल खासी मिथक – राजदूत मुर्गा

मानवता का सन्देशवाहक  मूल खासी मिथक – राजदूत  मुर्गा डॉ अनीता पंडा, शिलांग सीनियर फैलो, आई.सी.सी.आर. दिल्ली विश्व स्तर पर संस्कृति मानवीय मूल्य हैं, जिसमें तत्व ज्ञान, दर्शन, धर्म, मान्यता और लोक समाहित है I इसी संस्कृति से मानव के जीवन में अनेक नियम और विधि-विधान बने हुए हैं I खासी समुदाय में पहाड़ियों, पर्वतों, […]

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डायरी के कुछ पिछले पृष्ठ

विश्व के सभी दिव्यांग खिलाड़ियों को मेरी तरफ से अशेष शुभकामनाएं. आज से ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में वर्ष 2016 में पैरालम्पिक (उच्चारण जो हो) आरम्भ है और मैं भारतीय होने के नाते , एतदर्थ इस लोभवश अपने खिलाड़ी भाई-बहनों को यह शुभकामना देता हूँ कि वे काफी अच्छा प्रदर्शन कर सामान्य ओलिंपिक में […]

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नमक की आपूर्त्ति

नमक की आपूर्त्ति नहीं हो पा रही थी । साप्ताहिक हाट लगने बन्द हो गए थे । मेरे पिताजी के वेतन बन्द हो गए थे, घर की हालत निरीह ‘बकरी’ जैसी थी ! …. भय, भूख, कोख ….सब खाली ! कांग्रेस का यह काला चेहरा ! गोरी प्रियदर्शिनी की कलंकिनी रूप ! प्रथम महिला प्रधानमंत्री […]

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दहेज रूपी अमर बेल की जड़ें काटने का सही समय अब

………………………………………………………………… दहेज प्रथा भारतीय समाज में अमरबेल की भाँति इस तरह फैली कि इसने समाज के वट वृक्ष की सभी शाखाओं को न केवल आच्छादित कर लिया अपितु एक-एक शाखा की हरीतिमा को सोख लिया। लोलुप तर्कशास्त्रियों ने इसे संस्कृति में अंतर्निहित परंपरा मानने की दलीलें दीं औऱ कुछ ने समाज का अनिवार्य अंग मानकर […]

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कभी आया नही

तेरे घर मिलने कभी आया नहीं और तूने भी मुझको बुलाया नहीं दिल की बात तूने दिल में ही रखी दिल की बात मैंने भी बताया नहीं दिल तुझको ये अपना देकर सनम फिर दिल ये किसी से लगाया नहीं रात भर चाँद तारों से बातें करी बिन तेरे सपना मैंने सजाया नहीं याद आए […]

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कोरोना डायरी (कोरोना पर पहली डायरी)

दिसम्बर 2019 ●● मनुष्यों में जो रोगाणु और अब तो विषाणु एक-दूसरे-तीसरे-चौथे, फिर अनगिनत लोगों में प्रवेश कर दुनिया को हाहाकारी अवस्था में लाकर पटक दिए हैं, इस व्यथा-कथात्मक भ्रूण भले ही दशक पुरानी है, किंतु आरंभिक केस दिसम्बर 2019 में आयी, वो भी चीन के वुहान शहर से ! पता नहीं, चमगादड़ के जूठे […]

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एकांकी- “बुढ़ापा चाहता है अपनो का साथ”

चरित्र – 1- भानू प्रताप बेटा- मल्टीनेशनल कंपनी में डायरेक्टर 2-अमृता- भानू प्रताप की पत्नी (ब्यूटी पार्लर की मालकिन) 3-चाहत और चिंटू- दो बच्चे, चाहत – उम्र आठ वर्ष, चिंटू – उम्र बारह वर्ष 4- कमला- भानू प्रताप की माँ (उम्र 70 वर्ष)  पांच वर्ष पूर्व पति की मृत्यु हो चुकी है। कमला के पैरों में दर्द […]

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उन दिनों की बात

साथियों ! नमस्कार ! नेहा जी के अनुरोध पर विचार करते हुए यह तय किया कि कुछ मैं भी लिख दूँ । हालाँकि यह दिए गए विषय से कोसों दूर है लेकिन फिर भी लिखने का मकसद है कि नई पीढ़ी के लोगों को उन दिनों की सामाजिक मर्यादा , शुचिता व परंपराओं के बारे […]

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एक पत्र गाँधी के नाम

प्रिय बापू आप अमर थे! अमर हैं!और अमर रहेंगे! क्योंकि जो आपने कहा, जिया और गढ़ा, ‘सत्य ही ईश्वर है’ का जो मन्त्र आपने दिया और जो दूरदृष्टि आपके पास थी वो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। आशा ही नही वरन पूर्ण विश्वास है कि जगत गुरू शंकराचार्य ने ‘ब्रह्म सत्यम् जगत मिथ्या’ का […]