Category : गीत/नवगीत

  • मानव बनकर दिखलाएं हम

    मानव बनकर दिखलाएं हम

    (तर्ज़- वह शक्ति हमें दो दयानिधे कर्त्तव्य मार्ग पर डट जाएं——)   हैं मानव तेरी दुनिया के, मानव बनकर दिखलाएं हम ऐसा वर दो हे नाथ हमें, जग हेतु कुछ कर पाएं हम- हम सरिता हैं...

  • शराबबंदी

    शराबबंदी

    घर बन गया मन मंदिर बन गया, शराबबंदी से मेरा संसार बस गया। आता था पिके मारता था हमें दुनियां के भीड़ से डराता था हमें मदिरा एक सामाजिक कलंक बन गया, शराबबंदी …………… मदिरा से...

  • आल्हा उत्तर प्रदेश का

    आल्हा उत्तर प्रदेश का

    बड़े लड़ैया सैफइ वाले, जेकरी लाज रखइं करतार लट्ठ बजइ हर दिन यूपी मा, निसरइ बल्लम अउर कटार पाँच डकैती, पचपन हत्या, राहजनी केउ गिनइ न भाइ लखनउवा कइ अइसन हालत, छोटकी गल्ती गिनी न जाइ...

  • पीड़ा

    पीड़ा

    पीड़ा पारावार हुई है, टूटे उर तंत्री के बंधन । समय व्याध तू गर रुक जाता ! तो यह निर्मम क्षण न आता । तूने युगल न तोड़ा होता – तन्हा क्रौंच न अश्रु बहाता ।...

  • उजियारे का गीत

    उजियारे का गीत

    अँधियारे से लड़कर हमको,उजियारे को गढ़ना होगा ! डगर भरी हो काँटों से पर,आगे को नित बढ़ना होगा !! पीड़ा,ग़म है,व्यथा-वेदना, दर्द नित्य मुस्काता जो सच्चा है,जो अच्छा है, वह अब नित दुख पाता किंचित भी...

  • गीत 2

    गीत 2

    क्लेशों का हर कल्मष हर लो, बरसाओ रस-धारा। स्वागत है, हे नव संवत्सर! सौ-सौ बार तुम्हारा। पूरब में प्रकटे सूरज की कुछ ऐसी अरुणाई। जागे जिसे देखकर सोये भारत की तरुणाई। छिन्न-भिन्न हो क्रूर विचारों, कुण्ठाओं...

  • गीत १

    गीत १

    होली पर मन ही मन खेले लगा अबीर, गुलाल हम। प्रिय! कुछ पल के लिए बन गये सोनी तुम,महिवाल हम। अमराई सपनों की महकी,  फूले फूल पलाश के। हरसिंगार झरे धरती पर बन्ध कसे भुजपाश के।...


  • गौरैया

    गौरैया

    खपरैले के नीचे, गौरैया के बच्चे रहते थे ।। यह बच्चे एक दिन, उड़ जायेंगे, दादा जी कहते थे । * खपरैले में गौरेया ने नन्ही नीड़ बनायी थी,। जाने कहाँ कहाँ से वो तिनके चुनचुनकर...

  • “गीत”

    “गीत”

    छंद- आनंदवर्धक (मापनीयुक्त) मापनी- 2122 2122 212 ऋतु बसंती रूठ कर जाने लगी कंठ कोयल राग बिखराने लगी देख री किसका बुलावा आ गया छाँव भी तप आग बरसाने लगी॥ मोह लेती थी छलक छवि छाँव...