कविता

कुछ मत बोलो

कुछ मत बोलो दीवारों के भी कान होते हैं -उसने कहा यदि वृक्ष, तितलियाँ  ,फूल सुन भी लेंगें तो क्या होगा -मैंने कहा प्यार के नि :शब्द होता है उसे अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता -उसने कहा उसे स्पंदन में ,नसों के भीतर प्रवाहित लहूँ  में महसूस किया जा सकता है हमारी आत्मा की देह […]

कविता

आशा

आपसे मिले तो आशा हुई | बिछड़े तो फिर निराशा हुई | लेकिन हाँ , एक बात तो हुई | पहले वाली ख़ुशी फिर से मिल गयी | भले एक दो पल के लिए ही | आपसे मिल कर ख़ुशी तो हुई | आप भी उस दिन के इंतजार में थी | कब हो मुलाकात […]

कविता पद्य साहित्य

उत्तर दो हे सारथि !

उत्तर दो हे सारथि ! जीवन-संग्राम के मध्यस्थल में इस काया रथ में बैठकर ……, मेरा मन-अर्जुन पूछता है विवेक–सारथि कृष्ण से , हे ज्ञान-सारथि ,सुनो ! मुझमें उठ रहे अनंत,अतृप्त जिज्ञासाओं को, क्या तुम शांत कर सकते हो ? राजाओं के युद्ध में कई विकल्प है जय,पराजय ,संधि या मृत्यु …… किन्तु जीवन-युद्ध का […]

कविता

मेरे पापा

माँ की कोख में भी तुमको पापा मैं सुन पाता था मेरे लिए वो फ़िक्र तुम्हारी सुनके मैं इठलाता था गर्भ में माँ के साथ साथ मैं ह्रदय तुम्हारे पलता था मुझको ही तो सोच तुम्हारा एक – एक पल गुजरता था खेल खिलौने , बस्ता और कॉपी पिज़्ज़ा बर्गर , चिप्स और टॉफी तुमसे […]

कविता

कविता

मेरा दर्द पल पल बढ़ती दीवार पर चढी उस बेल की तरह है जो हर बार आकाश छूने की कोशिश में लुढ़क जाती है जमीन पर मेरा दर्द सीने में कील की तरह चुभता है इतनी गहराई से कि मैं चिल्ला भी नहीं सकती मेरा दर्द जब तक कमरें में खामोश सा फ़र्श पर पड़ा […]

कुण्डली/छंद

ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

नंबर वन फिर से हुईं, साइना नेहवाल। एक साल में कर चुकी, हैट्रिक दफा कमाल। हैट्रिक दफा कमाल, गर्व से ऊँचा है सर। भारत का जो नाम, दिखाया है जग में कर। कह ‘पूतू’ कविराय, झुके कदमों में अंबर। मिले हमेशा जीत, रहो हरदम वन नंबर॥

कविता

मैंने देखा है

तुम्हारी आँखों में मैंने देखा है ,एक उम्मीद शायद बहुत ही करीब से जब मैं गुजरी हूँ तुमसे होकर ….. और ही बहुत ही ऐसे मोड़ जो दुख और उदासी के डगर से होकर जाती ही तुम तक ………. मेरी भी आँखों में एक मूरत जो याद दिलाते हैं हर पल तुम्हारे होने की भीनी […]

कविता

वह पागल लड़की

गर्दन झुका कर पीली रौशनी में नहाई वह लड़की गुमसुम सी बैठी है चुपचाप लैम्प पोस्ट के नीचे —— ख्वाब देखा था उसने कभी पढ़ेगी बहुत पढ़ेगी उसकी दोस्ती थी इसी पीली लैंप पोस्ट की रौशनी से जबकि उसे करनी थी यारी चूल्हे की जलती पीली लौ से— बौखला सी जाती है कभी कभी वह […]

कविता

कविता

उस दिन खुली थी बात जब मेरी खुशी झलकती है तेरी आँखों में झाँकने पर मेरा दर्द तुम्हारे पलकों तले नमी में होता है कहीं दबा तुम लाख छिपाओ दिल की बात जान ही जाती हूँ मैं तुम्हारी मौन की भाषा पढ़ ही लेती हूँ अहसासों की किताब का हर पाठ, क्योकि मैं तुम्हारे प्यार […]

कविता पद्य साहित्य

यतीम हूं ना…!

खाली पेट सोता हूं, यतीम हूं ना….! सूखे आँसू रोता हूं, यतीम हूं ना….! स्कूल की घण्टी सुन सहम जाता हूं, बाहर से ही शोरगुल सुन पाता हूं, चाहता हूं मैं भी कि पढ़ पाऊँ, पायलट बन आसमान में चढ़ जाऊँ, गैराज में गाड़ी धोता हूं, यतीम हूं ना….! सपने पुराने गुल्लक में पिरोता हूं, […]