हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : भारत और भारत की खोज

     विश्व-पटल पर जब से भारत की खोज हुई, तब से अब तक भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में नई-नई खोज हुई | पहले भारतीय लोग राम-रहमान से काम-कला तक के कलात्मक खोज में तल्लीन रहा करते थे, जिसके बदौलत ही विश्वगुरु की मानद-उपाधि से उपकृत हुआ करते थे और दुनिया भर के लोग दिया […]

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व्यंग्य : आईपीएस हो तो सरकार का काम करो…

ठाकुर दम्पति को लग रहा था कि मुलायम सिंह अमूल चीज का टुकड़ा हैं जिसे वो मजे से खा जायेंगे| भईये जिस नेता जी ने ममता बहन को लखनऊ बुलाकर प्रेस कांफ्रेंस में साथ में खड़े होकर बेरंग कोलकाता भिजवा दिया, वो नेताजी अमूल चीज का टुकड़ा नहीं, कडक सुपारी हैं, दांत तोड़ने के बाद […]

हास्य व्यंग्य

एक आम बात

हमको दशहरी आम पसंद है , और पत्नी को चौसा. पत्नी का कथन है थोडा खट्टा मीठा नहीं रहे तो मजा नही आये । हम दोनों के इस आम मतभेद में बेटी की चांदी है। हालात ये है की बेटी का पसंदीदा फल आम हो गया है । जहाँ 1 किलो आम लाकर काम चल जाता […]

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यथार्त व्यंग : उल्लू और हंस

अब उल्लू करे शृंगार, बाराती भालू बंदर, हंस खड़े रुक जाय, बाराती भालू बंदर //१ कोट पैंट मैकाले वाली, आज रंगाए उल्लू, तितऊ लौकी नीम संगाती, झब्बू कालू अंदर// २ अप्पू गप्पू पप्पू मिलकर, करे टीम तैयार, सचिव झूठ -फरेब सजाती, डालू बंदर //३ करे काम सब कौवा, जाकर दुष्ट विचार, कोयल पंक्ति से बाहर […]

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हास्य व्यंग : नारद की छुट्टी

हास्य व्यंग नारद की छुट्टी ===================== बदल गया अब जीर्ण ज़माना , नारद जी भारत आये / देखा जन -जन के हाथोंदेखा, इक छोटा सा खिलौना[मोबाईल] / कुछ देर रहे भौचक्के नारद , पागल जैसे करते बात / मोबाईल पर बोल रहे हैं ,,, न कोई दूसर प्राणी / , नारद की उत्सुकता जागी , […]

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मुक्तक =यथार्त व्यंग=कलमकार

[1] दिल मे दर्द था क़लम सहारा बन गयी, नुक्कत के हेर फेर मे बेवफा सी सज गयी , कलमकार का नज़रिया आज लाबींग जमाना हुआ, बिनु दूल्हे बारात सजी, दुल्हन की विदाई हो गयी [2] भूल गये सच्ची बातें, अब गौरब किससे पाएँगे , लाबिन्ग और शगूफा का नव नुक्कत रोज पढ़ाएँगे, गुमराह करेंगे […]

हास्य व्यंग्य

यथार्त व्यंग = शीर्षक =प्रियतमा

प्रियतमा ने खुश होकर कहा बंद करो तकरार मिल कर होली खेलेंगे साल के बारहों मास साल के बारहों मास होगी झूम -झुमाई या सासू माँ से दूर हुई अब आरारआईया ================================== वाह प्रियतमा अब समझ मे आई तेरी बात ================================= जाऊंगी मयके मम्मी को ले आऊँ साथ बैठ पकौड़ी खाऊंगी मै, मम्मी प्रियतम के […]

कविता हास्य व्यंग्य

जिस थाली में खाते है सब..

बात पते की बतलाता हूं, जिस पर मुझको खेद है, जिस थाली में खाते है सब, उस थाली में छेद है..!! ढोंगी क्या-पाखण्डी क्या, ये अभिनेता है जोर के, करते है सब तरफ दलाली, खाते पैसे चोर के, नेता पाई-पाई दबा के रखते सारे भेद है, जिस थाली में खाते है सब, उस थाली में […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति हास्य व्यंग्य

चींटी और टिड्डा की कहानी का भारतीय संस्करण

चींटे (ant) और टीडे की कहानी बाय मेरी जुबानी – ओरिजिनल स्टोरी – चीटा सारी गर्मी, कुम्हला देने वाली गर्मी में अपना घर बनाता है, बड़े जतन से खाने का इन्तेजाम करता रहता है, उसे सर्दियों के लिए सहेज के रखता जाता है और ये देख टीडा हँसता है के देखो चिंटा कैसे पगलाया हुआ […]

कविता हास्य व्यंग्य

व्यंग्य कविता – आदमी और कुत्ता

कौन आदमी है, कौन कुत्ता गायक अभिजीत ने अपने आचरण से इन प्रश्नों के सहज हल दिए “सड़कें, कारों और कुत्तों के लिये बनीं हैं” यह कहकर वे अपनी कार में बैठे और सड़क पर चल दिए. — डाॅ. कमलेश द्विवेदी मो.9415474674