हास्य व्यंग्य

काँटा लगा

कहते हैं सच्चा ज्ञानी वही है जो दुख में भी आनंदित रहे, हँसता रहे, मुस्कुराता रहे और गाता रहे। यही सच्चे जीवन का सार है। इस हिसाब से काँटे का गड़ना, चुभना या लगना शरीर के लिए दुख का कारण हो सकता है किन्तु इस दुख को भी कोई आनंदातिरेक के कारण गीत में बदल […]

हास्य व्यंग्य

हैप्पी बर्थ-डे बापू !

हे बापू! दो अक्टूबर को हम फिर तुम्हारा जन्मदिन मना रहे हैं। पहले भी मनाते रहेे हैं, आगे भी मनाते रहेंगे। क्या करें? मजबूरी है। सरकारी आदेश होता है। यदि सरकारी आदेश न हो तो इस देश के लोग स्वतंत्रता-दिवस और गणतंत्र-दिवस पर झण्डा तक न फहराएँ, फिर तुम किस खेत की मूली हो। कैलेंडर […]

लेख हास्य व्यंग्य

राजदीप सरदेसाई के लगे चाँटे का महत्त्व

राजदीप सरदेसाई को जिस किसी व्यक्ति ने थप्पड़ मारा वह अनुचित है और उसके लिए उसे कानूनी के अनुसार दण्ड मिलना ही चाहिए। बस इस घटना का इतना ही महत्त्व है इतनी सी बात ही काफी है। इससे अधिक ना तो अलोचना या फिर भर्त्सना करने की आवश्यकता है और ना ही किसी विधवा विलाप […]

हास्य व्यंग्य

हास्य व्यंग्य : भैंस का अंगूठा

थानेदार साहब को भैंस का दूध बहुुत पसंद था। वे अपना अपमान तो सह सकते थे, पर भैंसों की शान में कोई कुछ कहे यह उन्हें बिल्कुल पसंद न था। उनके शब्दकोश में गाय यदि माता थी तो भैंस-दादी। गाय टू स्टार थी तो भैंस थ्री। जब कोई कहता-काला अक्षर भैंस बराबर, तो पारा सातवें […]

हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : अब हम नंगे ही जायेंगे

प्रतीक्षा करना भारतीयों का राष्ट्रीय गुणधर्म है। यदि लंदन की सड़क पर भी आपको इंतज़ार की मुद्रा में कोई व्यक्ति दिख जाए, तो निश्चित रूप से कोई भारतीय ही होगा। होश संभालने से लेकर अब तक मैंने प्रत्येक भारतीय को किसी न किसी के इंतज़ार में डूबा पाया है। हमारी नानी जी थीं। बड़ी भक्त […]

हास्य व्यंग्य

जीवेत शरद शतम्!

आज मेरा जन्मदिन है अर्थात् मैं जीवित हँू। इस देश में जिंदा रहना बड़ा कठिन कार्य है। अटलांटिक और आर्कटिक ध्रुवों पर आसानी से जिंदा रहा जा सकता है, पर यहाँ जिन्दा रहना ज़रा मुश्किल है। मेरे भीतर की आत्मा को यह चोला पसंद आ रहा है, जिसके लिए मैं उसका हृदय से आभारी हूँ। […]

हास्य व्यंग्य

जवानी जिंदाबाद

मै अब थोड़ा-थोड़ा बूढ़ा होने लगा हूँ। ठीक वैसे ही जैसे पच्चीस वर्ष पहले थोड़ा-थोड़ा जवान होने लगा था। आपके माँ-बापों की तरह मेरे माँ-बाप की चिंता थोड़ी-सी बंडे गाड़ने वाली है? मेरे शैशव से ही उन्हें चरित्र संदिग्ध नज़र आता था। मुझे आज भी अच्छी तरह याद है, उस दिन जब यौवन ने मेरे […]

हास्य व्यंग्य

मुझे दीजिये ‘भारत रत्न’

भारत-रत्न देने का मुद्दा देशव्यापी हुआ है, यकीन मानिए मुझे हर भारतीय में एक भारत-रत्न की-सी आभा दिखाई देती है। मम्मी-पापा की अंगुली थाम कान्व्हेण्ट में जानेवाला शिशु हो या गाँव के आँगन की धूल में लोट लगानेवाला नौनिहाल-सब में मुझे भारत-रत्न की अलौकिक छटा दिखाई देती है। यहाँ तक कि उस दिन मुझे कुछ […]

हास्य व्यंग्य

नेता या नंगा

हमारे समाज ने हमें एक हमाम दिया है जिसमे सब नंगे होते है, ज्ञान चतुर्वेदी जी के भाषा में कहें तो नंगा होना बहुत जरुरी है इसीलिए हमाम का निर्माण हुआ.   लेकिन नेता अपवाद है, वो कहीं भी नंगे या नंगेपन पे उतारू हो सकते हैं, समय पर नंगे होते है, नंगापन दो प्रकार […]

हास्य व्यंग्य

भारत को हुआ डायबिटीज

एक आश्चर्यजनक सत्य! संसार में सर्वाधिक शक्कर क्यूबा में उत्पन्न होेती है किंतु सबसे अधिक मीठे लोग भारत में!! विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत डायबिटीज की राजधानी है। अगले दो-तीन सालों में हम सबसे ऊपर होंगें। चलो कहीं तो आधुनिकता की दौड़ में हम पहले स्थान पर पहुँचने का सौभाग्य हमें मिला। यह बात […]