बाल कविताशिशुगीत

फूल-ही-फूल

फूल हैं खिलते रंग-बिरंगे,
मौसम होता है जब अच्छा,
दिल सबका खुश होता देख के,
लाल गुलाब का प्यारा गुच्छा.

कितने ही हों फूल यहां पर,
चम्पा भी हो और चमेली,
पर गुलाब के खिल जाने से,
महक लुटाती नई हवेली.

लाल-गुलाबी-नीले-पीले,
ये गुलाब के फूल रंगीले,
उपवन में खिलते-मुस्काते,
भौंरे इन पर गाना गाते.

 

 

बच्चे भी हैं फूलों जैसे,
सुंदर, कोमल और महकीले,
आओ इनसे प्रीत निभाएं,
हम भी हो जाएं सपनीले.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

2 thoughts on “फूल-ही-फूल

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    बाल कविता अछि लगी लीला बहन .

  • लीला तिवानी

    प्रेम सच्चा हो तो प्रेम की बगिया कभी मुरझाती नहीं,
    प्रेम कच्चा हो तो प्रेम की बगिया कभी लहराती नहीं.

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