कविता : रानी लक्ष्मीबाई
रानी लक्ष्मीबाई धर काली का रोंद्र रुप अंग्रेजों का संहार किया ! मातृभूमि की रक्षा हेतु दुर्गा का अवतार लिया
Read Moreरानी लक्ष्मीबाई धर काली का रोंद्र रुप अंग्रेजों का संहार किया ! मातृभूमि की रक्षा हेतु दुर्गा का अवतार लिया
Read Moreमुस्कुराहट में ग़म हम छुपा लेते हैं ! मेरे हालात गैरों को भी रुला देते हैं ! ! हो जाते
Read Moreजो कभी कसमें खाया करता था मेरे नाम की आज, अजनबीयत का गिलाफ ओढ़े… मिला था मुझको ! ! जिसे
Read Moreवक़्त का फेर वक़्त है ढल चुका और ढल चुका वो दौर भी…. फ़िर भी आइने में, वक़्त पुराना ढूंढते
Read Moreमेरी दोस्त प्रीति को समर्पित ********************** कुछ कही कुछ अनकही कुछ जानी कुछ बेगानी कुछ यादें कुछ फरियादें बिन बोले
Read Moreगलियों में भटके चारे को, कूड़ा – कचरा सब खाए ! माँ की तरह पाले सबको, है गौ माता कहलाए
Read Moreजो बोली जाती है … भारत में मेरे कहलाए वो ‘हिन्दी’… पिछड़ों की भाषा ! आज सीख रहे हैं …
Read Moreइक बगिया में खिले दो फूल ! “बेटा” वारिस “बेटी” पराई कहलाए आखिर क्यों ?? जन्म ले बेटा खुशियाँ मने
Read Moreसुनो न कभी तुम भी **************** सुनो न कभी तुम भी खामोशियों को मेरी ! खामोश रह कर भी ये
Read Moreअधूरे से ख्वाब धुँधली तस्वीरें ग़म से भरीं…क्यों ये तकदीरें !! जब राहें जुदा क्यों प्यार हुआ बतला दे तू…ऐ
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