खामोशियां कुछ कहती हैं
पहाड़ी धुंध मेंछिपी अनकही बातेंसुनती है पगडंडी रात की आँचलधीमे स्वर में गातीटूटते तारे चाँद की लकीरजल में थरथरातीअनकहा सपना
Read Moreपहाड़ी धुंध मेंछिपी अनकही बातेंसुनती है पगडंडी रात की आँचलधीमे स्वर में गातीटूटते तारे चाँद की लकीरजल में थरथरातीअनकहा सपना
Read Moreनव विचारों मेंताज़ी हवा की ख़ुशबूउगती भोर है मन की मिट्टी मेंसपनों का बीज गिराचुपचाप खिला दूर क्षितिज परबादल की
Read Moreसूरज की किरण,ख्यालों की हल्की हवा,मन को छू जाए। चाँदनी रात में,स्वप्न बुनते ख्याल मिलें,दिल बहक उठे। फूलों की खुशबू
Read Moreसूरज की किरणेंधीरे-धीरे मन को छूतींधैर्य सिखातीं पत्थरों की राहकदम संभलकर चलते हैंसंतुलन सिखाती हवा की सरसराहटपत्तों को छूती धीरेशांति
Read Moreधूप की धारकंधों पर गिरतीरास्ता तपे थका सफररेत से उभरतीनई उम्मीद धुंधले कदमकठिनाइयों में भीचाल न टूटे अंधेरी राततारों की
Read Moreसवेरे की धूपबच्चों की हँसी संगरंग भरती है नई उमंगेंआकाश की चौखट परउड़ान माँगें नन्हा कदमभविष्य की राहों मेंचमक बिखेरे
Read Moreपहली किरण में,सपनों का आलोक है,जीवन का आरंभ। मिट्टी की गंध,आशा का कोमल स्पर्श,नव सृजन जागा। पवन की सरगम,मन के
Read Moreराहें अनजानी,कदमों की धूल में भी,सपनों का मौसम। भोर की किरणें,थके दिल को छू जाएं,नयी उमंगें हैं। पथरीली डगर,फूलों से
Read Moreचाँद भी चुप था,रात की नमी में डूबी—यादें बेआवाज़। पेड़ की शाखों पर,साँसों का सन्नाटा था,हवा भी बोली नहीं। कदमों
Read More