Author: डॉ. अशोक कुमार शर्मा

कविता

पिता से ज्यादा अमीर दुनिया में कोई नहीं

हाथ का स्पर्श,साया बनकर ढाँकता है,स्नेह की गर्मी। रात की चुप्पी,सपनों को सजाता है,ममता की छाया। पहली सीढ़ी,चलना सिखाए धैर्य

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