अनुप्रेक्षा
मन में उठे भाव,अनित्य का बोध दिलाए,जीवन का सच। धूप छांव जैसी,क्षणभंगुर यह देह कहे,अनुप्रेक्षा सिख। नदियों का बहाव,रुक न
Read Moreमन में उठे भाव,अनित्य का बोध दिलाए,जीवन का सच। धूप छांव जैसी,क्षणभंगुर यह देह कहे,अनुप्रेक्षा सिख। नदियों का बहाव,रुक न
Read Moreभोर की धुंध मेंसूरज की पहली किरणउम्मीद जगाती फूलों की गलियोंमधु संग उड़ते सभीसंगीत सा बहता बांसुरी की धुनपवन में
Read Moreख्वाबों को हकीकत में बदलने के इल्म को हासिल करने में हरेक शख्स को यकीं करनी पड़ती है,इसकी वजह जानना
Read Moreसहारे की सेहत पर किसी का भरोसा बिल्कुल ठीक नहीं होता है,सबका सफ़र इस बात पर अमल करते हुए चलता
Read Moreबड़े लोग अक्सर बड़ी बाते बस अज़ीज़ दोस्तों सी करते हैं,यह दोस्ती का इजहार नहीं है,बस उसकी दौलत पर नज़र
Read Moreआज़ अकेले बैठे हुए,सोचता रहा ,क्या इस शरीर और मन की में तमाम हसरतें,पूरी हो गई है,क्या ख्वाब जो देखे
Read Moreदिल की गहराई से,कहीं हुई बातें,ज़ुबान की सच्चाई रिश्ते तोड़ देती है।उम्मीद में सुकून देने वाली ताकत बनकर,रहने की लगातार
Read Moreएक अनजान बने हुए लोगों को,इसकी अहमियत नहीं होती है।कुछ हमदर्दी जताते हैं,कुछ लोग इसके लिए,बस जिंदगी की खुशियां खत्म
Read Moreयही स्वाभाव है,समर्पित मन का संकल्प है,हिमालय की परिकल्पना में,सहृदय सद्भाव है। नश्वर शरीर में मौजूद,उम्मीद की किरण है।नवीन चेतना
Read Moreपा लेने की हरेक पड़ाव पर मन की बेचैनी से,ही सुकून तड़पती रही है,उम्मीद में,अवरोध की शक्ति हर वक्त बढ़ती
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