Author: डॉ. अशोक कुमार शर्मा

कविता

खोया गौरव को लौटाने की कोशिश

सूरज ढलता है,पुराने स्वप्न जागते,धरा भी रोती। हवा की सरगम,सन्नाटे में गीत गाती,भीतर का शोर। स्निग्ध धुंध छाई,स्मृतियों की परतें

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कविता

पिता से ज्यादा अमीर दुनिया में कोई नहीं

हाथ का स्पर्श,साया बनकर ढाँकता है,स्नेह की गर्मी। रात की चुप्पी,सपनों को सजाता है,ममता की छाया। पहली सीढ़ी,चलना सिखाए धैर्य

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