इंसानियत का मर्म
बाकी सब कुछ भूलकर,जिसने किया जाति धर्म।वो अहमक क्या जाने,इंसानियत का मर्म। ऊंच-नीच की दीवारों में,जिसने खुद को कैद किया।नफरत
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Read Moreशब्द कभी केवल शब्द नहीं होते,वे समय के दस्तावेज होते हैं,जो लिखे जाते हैंसदियों की चुप्पियों के बीच,और पढ़े जाते
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Read Moreतुम्हारे सहे हुए उत्पीड़न का दर्द,जो तुमने कभी नहीं लिखा,उसकी सज़ा तुम्हारी औलादेंक्यों और कब तक भुगतें? काश! तुमने उसे
Read Moreसोशल मीडिया पर आकररख जाते दिल का हाल,पर जब कोई पूछे रिश्तों का सच,तो चुप हो जाते तत्काल। डिजिटल रिश्तेदारहजारों-लाखों
Read Moreमत भूल, नारी केवल घर की नहीं,समाज और सभ्यता के सम्मान की पहचान होती है,संस्कारों की धड़कन, परिवार की मुस्कान
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