गाँव हृदयहीन नहीं होता
हृदयहीनलोग नहीं होते,पूरा गाँव नहीं होता। ये तो होते हैं कुछ चालाक,मतलबपरस्त,राजनीति के धूर्त,जो अपनी खोपड़ी की योजनाओंको देना चाहते
Read Moreहृदयहीनलोग नहीं होते,पूरा गाँव नहीं होता। ये तो होते हैं कुछ चालाक,मतलबपरस्त,राजनीति के धूर्त,जो अपनी खोपड़ी की योजनाओंको देना चाहते
Read Moreपरंपराओं से आगे ज़रा बढ़कर तो देखो,पुरातन झंझावातों से थोड़ा उबरकर तो देखो।बदल दो उस व्यवस्था को,जो रोकती हो आगे
Read Moreहां देखा है मैंने लोगों कोजीवित रहने के लिए करते हुए कवायद,दुआओं से लेकरअपने इष्ठों से करते खुशामद, धन,दौलत,जमीन,घर व
Read Moreसंघर्षों को तू भी भूल गया,मैं भी भूल गया,जिनकी उम्मीदों पर था भरोसा,उसी ने दिया शूल नया। तू भी जीए
Read Moreकितनी सदियाँ बीत गईं, पर घाव अभी भी ताज़ा है,इंसान से पहले यहाँ अक्सर उसका जाति पूछा जाता है।बराबरी की
Read Moreमेरा देश ऐसा है भैया,जहाँ ज़मीर से पहले जाति जागता है,इसके धुन में बड़ा से बड़ा अपराधीअपने अपराधों संग खुलकर
Read Moreजो अटल है, अजर-अमर है,उसकी पीठ में घोंप रहे हो खंजर।अपनी निर्दयता के मद में चूर,कर रहे हो वनों को
Read Moreमत कह मुझे सीधासाधा, भोला या मासूम,वक्त पड़े तो दिखा सकता हूँअपना अनदेखा रौद्र रूप। कर लो जितनी मनमानियाँ करनी
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