भरत मिलन
वन गमन श्रीराम जी की थी अति दुःखदाई भरत सुन ये संदेशा उन्हें शर्म बहुत आई लौटे वापस ननिहर से
Read Moreजब तलक मन में थी तुम कुवाँरी याद आती थी हर पल अक्स तुम्हारी जब से पढ़ लिख कर हो
Read Moreहम हिन्दूस्तानी कर्म है ज्ञानी पावन धरती प्यारा हिन्दुस्तान भारत मेरी माता दधिचि सा दाता ना है विश्व में कोई
Read Moreकोई जहाँ ना हो अपना साथी बन जा खुद की दीये की बाती कोई किसी का ना होता है मतलब
Read Moreजब तक सूरज चाँद रहेगा जग हिन्दी की सम्मान करेगा जो भारतीयता की मूल आत्मा है जन जन में बसा
Read Moreबेईमानों की इस बस्ती में ईमान की बात क्यूँ करते हो नक्कारखाने में तुती सुनाने की बेकार की आस क्यूँ
Read More