गीत
तुम बिन बंधु, बहुत व्याकुल मन !जैसे एक हिमपात हुआ है, सूख गया है उर का कानन। फलित पेड़ हो
Read Moreमैं ही हूं , छोटी इ, और मैं ही बड़ी, ई की प्रदातासदियों से, चली आ, रही है मेरी अलौकिक,
Read Moreभैंस बराबर काला अक्षर चल जाएगा। चपरासी हो पढ़ा लिखा ही बहुत जरूरी।डिग्रीधारी को चुन पाना है मजबूरी।। धीरे -धीरे
Read Moreये दरकते पहाड़, ये खिसकती ज़मीनें,नदियों में बहकर, सिमटती ज़मीनें,ये पानी की बूंदे डराने लगी हैं,ये जबसे ज़मीं को बहाने
Read Moreजुदा हो करके के तुमसे अब, तुम्हारी याद आती हैमेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती है कहूं कैसे
Read Moreजलते अलबत्ता लाखों दीपक संसार में।आओ एक दीप जलाए इस प्यार में।अनुकंपा की सौगात है।दीवाली वाली रात है।राजाओं की झोली
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