कर्तव्य पथ पर बढ़ता जा
दुश्वारियां कितनी भी हों, कर्तव्य पथ पर बढ़ता जा।हिम्मत कभी नहीं हारना, तूफानों से भिड़ता जा। अपने कर्म से ही
Read Moreदुश्वारियां कितनी भी हों, कर्तव्य पथ पर बढ़ता जा।हिम्मत कभी नहीं हारना, तूफानों से भिड़ता जा। अपने कर्म से ही
Read Moreजगह-जगह छिपे हुये यहां आदमखोर हैऐसे लोगों का आजकल देखो जोर हैं बंद है सुविधा यहां काली तिजोरियों मेंऔर मची
Read Moreपरिवर्तन से भय कैसा, करनी से फल मिलता वैसा।सत्य कर्म सब दूर हुए हैं, भगवन भी मजबूर हुए हैं।जैसा बीजा
Read Moreदृग रोए हँसे अधर धर कर, मुस्कन की झूठी अरुणाई,मैं सरित चंचला सागर को,सर्वस्व समर्पित कर आई….वह बाहु पाश जो
Read Moreअपने हाथों को फैलाकर, दिन का स्वागत करती हूँ।पंख नहीं दिखते हैं मेरे, किंतु उड़ानें भरती हूँ ।। सूरज ने
Read Moreयाद मुद्दत से वो है आया कहाँ,गुफ्तगू प्यार की सुनाया कहाँ,जुस्तजू दिल की वह बताया कहाँ,रूबरू खुल के अभी आया
Read Moreझम-झम बरसत,मन मम तरसत,कब तक लखब सजन पथ न। पल-पल कट-कट करत ननद घर,कब लग सहब सजन हम डर-डर,नभ घन
Read Moreदीपों से अंधकार न मिटता, अन्तर्मन का, दीप जलायें। प्रतीकों को छोड़ बर्ढ़े अब, स्वच्छता का, अलख जगायें। अविद्या का
Read Moreतुम हो जब तक तभी तक आनंद मेरा,तुम आई तो जीवन में आया नया सबेरा ।थकी -थकी सी जिन्दगी दर्द
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