मुक्तक
पिता हमें साथ लेकर चलें वो पिताजी।कठिन राह चलते हमारे पिताजी।समंदर सदृश भाव रखते सदा हीबड़े आज हैं बेसहारा पिताजी।।
Read Moreआप सभी को मैं करूँ, शत-शत बार प्रणाम।आओ मिलकर हम लिखें, नव जीवन आयाम।। जन्म दिवस फिर आ गया, मुझको
Read Moreजितना देते हम रहे, उनको ज्यादा मान।उतना ही वे फैलकर, दिखा रहे हैं शान।दिख लाया जब आइना, लगे चुराने आँख।जाने
Read Moreमन का दर्पण जब चमकेगा,महक जाएगा जीवन।मन में पावनता महकेगी,दमक जाएगा जीवन।मन को मंदिर जैसा मानो,जीवन बने सुहावन,मन का पंछी
Read Moreबढ़ती उम्र के साथ, शौंक बदल जाते हैं,चने खाने की ताकत ख़त्म, अंगूर भाते हैं।सजना सँवरना, स्टाइल के प्रति सजगता,बच्चों
Read More“एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य हित योग”,भोग भी करो ऐसे जैसे सहज योग,हंसते-गाते रहो, सृष्टि को महकाते रहो,आत्मा महकेगी, तन-मन रहेगा निरोग।
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