प्रज्ञा करूणा और समता
चुपचाप बहती,ज्ञान की नदी गहरी,मन को छू ले। मृदु शब्दों में,दुखियों का सहारा बने,करुणा सदा। समान धूप-छाँव,सबका अधिकार बराबर,समता खिलती।
Read Moreचुपचाप बहती,ज्ञान की नदी गहरी,मन को छू ले। मृदु शब्दों में,दुखियों का सहारा बने,करुणा सदा। समान धूप-छाँव,सबका अधिकार बराबर,समता खिलती।
Read Moreसावधान कदम सेपतझड़ की पत्तियाँ झरेंहवा धीमी बहें नीचे की ओरझील की शांत लहरेंप्रतिबिंब चमके सिर को ऊपर रखेंसूरज की
Read Moreअधूरी रातेंसन्नाटे में गूँज उठेदिल की आवाज़ सपनों की राहअजनबी मंज़िलों मेंखोया सफ़र साया कहीं दूरसंग-साथ का इंतज़ारमन अकेला हवा
Read Moreमैं मानव हूंऔर कुछ नहीं, सच मेंधूप की तरह साँसों में बसीअनगिनत कहानियाँमौन के बीच पगडंडी परपत्थर भी मुस्कुरातेचलते कदमों
Read Moreधुंधली सी राहआकाश में टंगा चांदमन की प्यास सन्नाटा गहराझील में चांदनी तैरेखामोश रात धीमी सी हवाबादलों के आंचल मेंछिपा
Read Moreरक्तिम आकाशरोती हुई धरतीखामोश इंसान टूटे हैं सपनेबिखरे हैं अरमानसिसकती हवाएँ नफरत की आगजलते हुए घरबुझती उम्मीद मासूम आँखेंडर से
Read Moreमन के आंगन में,एक कोना शांत रहे,सपनों की छाँव। भीड़ के बीच भी,थोड़ी सी तन्हाई हो,खुद से मुलाकात। शोर से
Read Moreवो धूप की किरणेंचेहरे पर गिरती हैं धीरेदिल में उजाला फैलता सड़क पर पाँव मेरेछोटी-छोटी खुशियाँहर कदम में उम्मीद साँसों
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