हाइकु/सेदोका

हाइकु/सेदोका

प्रज्ञा करूणा और समता

चुपचाप बहती,ज्ञान की नदी गहरी,मन को छू ले। मृदु शब्दों में,दुखियों का सहारा बने,करुणा सदा। समान धूप-छाँव,सबका अधिकार बराबर,समता खिलती।

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हाइकु/सेदोका

दिल अपनों की तलाश में हैं

अधूरी रातेंसन्नाटे में गूँज उठेदिल की आवाज़ सपनों की राहअजनबी मंज़िलों मेंखोया सफ़र साया कहीं दूरसंग-साथ का इंतज़ारमन अकेला हवा

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हाइकु/सेदोका

चांद मिलता नहीं है आसान से

धुंधली सी राहआकाश में टंगा चांदमन की प्यास सन्नाटा गहराझील में चांदनी तैरेखामोश रात धीमी सी हवाबादलों के आंचल मेंछिपा

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हाइकु/सेदोका

यह युद्ध नहीं, मानवीय मूल्यों पर प्रहार है

रक्तिम आकाशरोती हुई धरतीखामोश इंसान टूटे हैं सपनेबिखरे हैं अरमानसिसकती हवाएँ नफरत की आगजलते हुए घरबुझती उम्मीद मासूम आँखेंडर से

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