इतना सन्नाटा पसरा हुआ है क्यों
चुप गलियां हैंहवा भी थमी सीकुछ तो हुआ सूनी राहेंकदमों की आहटकहाँ खो गई खिड़की उदासपरदे भी चुप हैंकिसका इंतज़ार
Read Moreचुप गलियां हैंहवा भी थमी सीकुछ तो हुआ सूनी राहेंकदमों की आहटकहाँ खो गई खिड़की उदासपरदे भी चुप हैंकिसका इंतज़ार
Read Moreसर्द हवाओं मेंकदम ढूँढते दीवारेंगुमान छुपा बैठा खिड़कियों के सायेसपनों की मूरत टूटतीखामोशी गाती पुराने फर्श की छाँवयादों के रंग
Read Moreचुप नदी बहतीशब्दों में न समाए भावहृदय फुसफुसाता पतझड़ की पत्तियाँभावनाएँ चुपचाप गिरेंअदृश्य पर गहरी सुबह की ओस चमकेआनंद के
Read Moreसन्नाटा गहरा,अनकहे भाव छुपाए हैं,मन बोले चुप। हवा के झोंके,कभी कहें तो कभी चुप,संदेश लाए। पानी की धारें,धीरे-धीरे बहती जाएं,शब्दों
Read Moreशीतल हवापत्तों की सरगम मेंमन मुस्काए नीला गगनसपनों को देता हैअनंत दिशा नदी की धुनबहती हुई कहतीछोड़ो विषाद हरी घास
Read Moreफायकू – सतगुरु देव सतगुरु केवल शब्द नहीं जीवन आधार है तुम्हारे लिए। जिसने जानी सतगुरु माया उसकी बदली काया तुम्हारे लिए। सतगुरु केवल
Read Moreहायकु शिव शंकर, करे जब तांडव, मिटे दानव।। कैलाश नाथ, सिर पर हो हाथ, तरे संसार।। बड़े बुजुर्ग, हो आदर
Read Moreएक घाट का जलसबके अधरों परसमान प्यास धूप तपती हैछाँव बाँटती धरतीमिटे विभाजन माटी की खुशबूरोटी की गर्माहटसाझा धड़कन एक
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