वीर बहूटी – बालगीत
वीरबहूटी कहलाती हूँ। छूते ही शरमा जाती हूँ।। लाल रंग मखमल-सी काया। जिसने देखा रूप सुहाया।। रेंग – रेंग कर
Read Moreवीरबहूटी कहलाती हूँ। छूते ही शरमा जाती हूँ।। लाल रंग मखमल-सी काया। जिसने देखा रूप सुहाया।। रेंग – रेंग कर
Read Moreकोरोना है बड़ा खुर्राट लॉक हो या अनलॉक बेजरूरत ना निकलो घर से अपनी सुरक्षा अपने हाथ हाथ में हो
Read Moreजल संरक्षण अभियान चलाओ देश में पानी की बचत कराओ नदियाँ और तालाब में कुएँ में और नहर में टंकी
Read Moreजो शिव-शंकर को भाती हैबेल वही तो कहलाती है—तापमान जब बढ़ता जातापारा ऊपर चढ़ता जाता—अनल भास्कर जब बरसातालू से तन-मन
Read Moreगर्मी आई ! गर्मी आई!! स्वाद भरी सौगातें लाई। बाड़ी में महके- ख़रबूज़े। लाल शहद – से हैं तरबूजे।। खीरा
Read Moreलाल रंग के सुमन सुहाते।लोगों को हैं खूब लुभाते।।—रूप अनोखा, गन्ध नहीं है,कागज-कलम निबन्ध नहीं है,उपवन से सम्बन्ध नहीं है,गरमी
Read Moreतन-मन की जो हरता पीरावो ही कहलाता है खीरा—चाहे इसका रस पी जाओचाहे नमक लगाकर खाओ—हर मौसम में ये गुणकारीदूर
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