लघुकथा – खिचड़ी
“माँ जी ! आज त्यौहार है। घर में पकवान बने हैं। आप क्या खायेंगी- पूड़ी, कचौड़ी, पुलाव, खीर या कुछ
Read More“माँ जी ! आज त्यौहार है। घर में पकवान बने हैं। आप क्या खायेंगी- पूड़ी, कचौड़ी, पुलाव, खीर या कुछ
Read Moreगाँव में दो लड़कों का नाम, पिता का नाम और यहाँ तक कि गाँव का नाम भी एक ही था।अपराध
Read Moreमैंने मचल कर अपनी भाभी से कहा “भाभी प्लीज मुझे वो आपकी सेंडिल पहनने को दे दो ना, मेरे स्कूल
Read More“भतीजे की शादी में दस साल बाद गाँव लौटे रमन को अपना गाँव घर पहचान में ही नहीं आ रहा
Read Moreगाँव की पगडंडी पर शाम का अँधेरा उतर रहा था। खेतों से लौटते लोग अपनी-अपनी झोपड़ियों में जा चुके थे।
Read Moreसुबह जब उसने फेसबुक खोला तो सामने आई पोस्ट देखकर हतप्रभ हो गया। ऐसा कैसे हो गया? अभी कल ही
Read Moreडा. सृष्टि अपने पति के कार से मंदिर जा रही थी, मंदिर के रास्ते में
Read Moreस्वतंत्रता दिवस का समारोह सम्पन्न हो गया। अगले दिन सुबह की सैर के लिये जाते हुये राजीव ने देखा कि
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