लघुकथा – विडम्बना
आँगन में खेलते बच्चों को श्यामा आवाज लगाती है ! चलो आओ खेलना बंद करो बच्चो !! देखो मैने भोजन
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Read Moreमाटी की महक। गांव में रहते लोगों का भोलापन। लहलहाते खेत। गाय भैंस का रंभाना। बैलगाड़ी की सवारी। अमरूद, आम,
Read Moreहेलो, जी मैं “अलाने” शहर से विकराल रूप झंझावात बोल रहा हूँ। क्या मैं “फलाने” शहर के कुपित कुमार अग्नि
Read Moreनिवी अपना कॉलेज पूरा भी ना कर पाई थी घरवालों ने उसका विवाह कर दिया। दर्श अच्छे परिवार का होनहार
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