आस्था लौट आई
“मम्मा देखो-देखो, मैं क्या लाया हूँ.” स्कूल से आए सोनू ने बड़ी उमंग से अपने हाथ में मिट्टी के छोटे-से
Read More“मम्मा देखो-देखो, मैं क्या लाया हूँ.” स्कूल से आए सोनू ने बड़ी उमंग से अपने हाथ में मिट्टी के छोटे-से
Read More“दादा जी, बरसात रुक नहीं रही, बाढ़ आ रही है, हम यहाँ मचान पर बिना खाये-पिये फंसे हुए हैं, अब
Read Moreसड़क पर धूप तप रही थी। पांवों के नीचे तपती मिट्टी, कंधों पर बोझ से भरे थैले और आँखों में
Read Moreएक छोटा-सा संदूक पीतल का, पर चमकता सोने-सा।नानाजी-नानीजी ने माँ को दिया थाउनकी शादी के समय आशीष, परंपरा और अपनापन
Read Moreचुनावी दौर था ।धन्नु को नेताजी के फोन आते । नेताजी धन्नु को धनपत कहकर संबोधित करते उसके परिवार का
Read Moreनिर्बल को न सताइए,जाकी मोटी हाय, बिना जीव की श्वास से,लौह भस्म हो जाए। संत कबीर दास के इस दोहे
Read Moreना जाने क्यों, जब भी हरसिंगार की सुवास मेरी साँसों से टकराती है, मेरा मन खिंचा चला जाता है। यह
Read Moreट्यूशन से लौटकर आया हुआ रोहित घर में घुसते ही दादा जी से टकरा गया। दादा जी ने उसे रोककर
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