गीत – नयां साल है नईं सवेर
गुलशन में फूलों के ढेर। नयां साल है नई सवेर। मुबारिक धरती अम्बर को। मानवता के मन्दिर को।
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Read More(संविधान दिवस पर)मैं भारत का संविधान हूँ , अपनी व्यथा सुनाता हूँ।क्या- क्या मेरे सँग होता है,सारी बात बताता हूँ।कसमें
Read Moreनारी नित मुश्किल से लड़ती, संघर्षी है नारी जीवन। देकर घर भर को उजियारा,पर दुख पाता नारी जीवन ।। कर्म
Read Moreलेखनी!कुछ फूल श्रद्धा के भी तुम उन पर चढ़ा दो। जो धरा की गोद में ,सब कुछ लुटाकर सो गए
Read Moreजब न ढले दर्द भरी दुपहरी, तुम चले आना। जब मुस्कुराए संध्या सुंदरी, तुम चले आना। राह तकते तकते शाम
Read Moreदुनिया की भीड़ में कोई मेरा अपना नहीं है,जो टूटा ना हो ऐसा कोई मेरा सपना नहीं है। दूसरों को
Read Moreहे कृष्ण एक बार फिर धरा पर आ जाओनफ़रत की इस दुनिया में तुम,फिर से सबके दिल में एक बारगोपियों
Read Moreसांझ घिरने लगी, दीप जलने लगे बस यही कामना आप आ जाइए। और रातें किसी भांति कट भी गयीं किन्तु
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