मुक्तक – विश्व योग दिवस
“एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य हित योग”,भोग भी करो ऐसे जैसे सहज योग,हंसते-गाते रहो, सृष्टि को महकाते रहो,आत्मा महकेगी, तन-मन रहेगा निरोग।
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Read Moreयोग दिवस पर क्यों भला, मचा रहे सब शोर।इससे पहले कब भला, खुली आँख थी भोर।। सपना है या सत्य
Read Moreसंत कबीर जन्म जयंती आज है, जिनका नाम कबीर।जन मन कहते प्रेम से, पीर संग रघुवीर।। तीखे उनके बोल थे,
Read Moreरिमझिम बरसें मेघ जी ,मन में भरें फुहार,दादुर झींगुर गा रहे ,खुशियों की झंकार। पावस में गाने लगी ,कोयल सुमधुर
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