बाल कविता – जुगनूं
रात में जुगनूंमस्ती करते हैंउड़ते हैं गगन में कभी इधर, कभी उधरदूर तक दौड़ लगाते हैं एक लम्बी उड़ानजुगनूं जब
Read Moreरात में जुगनूंमस्ती करते हैंउड़ते हैं गगन में कभी इधर, कभी उधरदूर तक दौड़ लगाते हैं एक लम्बी उड़ानजुगनूं जब
Read Moreनन्हे हाथों थामकर,बैठा हँसता लाल।गोदी में लौकी लिए,जैसे हरित विशाल॥ हरा-भरा यह फल कहे,प्रकृति बड़ी महान।इससे मिलकर सीख लो,सादा सुंदर
Read Moreचंदा मामा, चंदा मामा, रात के राजा चंदा मामा,धरती मां के भाई चंदा, इसीलिए हैं हमारे मामा।रोज रात को आते
Read Moreजब चूहे बिल्ली को देखते। डर के कारण सारे चूहे बिल में घुस जाते। जब तक बिल्ली नहीं जाती सारे
Read Moreगुरुजी सबसे प्यारे हैं,ज्ञान-दीप उजियारे हैं।अच्छी बातें हमें सिखाते,जीवन के रखवाले हैं। अ, आ, इ, ई पढ़वाते,गीत सुनाकर मन बहलाते।हँसते-हँसते
Read Moreभोली-सी चिड़िया आंगन में,अब कभी नहीं फुदकती है।चीं-चीं की आवाज नहीं आती,मस्ती के गीत नहीं सुनाती है। अब आंगन नहीं
Read Moreपानी-पानी हो गयी धरतीपानी ही पानी चारो ओर काग़ज़ का नाव बनातेचुनमुन और मुनमुन पानी की लहरों मेंनाव चलातेउछल-उछल करनाव
Read Moreबचपन की प्यारी मस्ती,हँसी में छुपी खुशबू।दोस्तों संग खेलते हैं,हर दिन हो नया धूम। बारिश की बूँदों में,कागज़ की कश्ती
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