नन्हे ढोल
नन्हा ढोल गले में आया,ढम-ढम करके गीत सुनाया। टुन-टुन, ढम-ढम धुन बजाते,आँगन भर में रौनक लाते। छोटे हाथों ने जब
Read Moreभोगीपुर गाँव के पूर्वी छोर पर फैले सरसों के खेतों के बीच एक छोटा-सा घर था। मिट्टी की दीवारें, खपरैल
Read Moreनन्हे बच्चे मैदान आए,खेलने का मन बनाए।हाथ में बैट, गेंद भी लाल,खेल लगे सबको कमाल। अंकल पास खड़े मुस्काएँ,“शाबाश!” कहकर
Read Moreलाल गाड़ी चली सड़क पर,दो दोस्त बैठे हैं उस पर।आगे वाला गाड़ी चलाए,पीछे वाला गीत सुनाए। हँसना-खेलना, बातें करना,साथ सफ़र
Read Moreरोटी गरम बाजरे वाली।सरसों की भुजिया से खा ली।। जाड़े के ये अनुपम भोजन।करते नया स्वाद संयोजन।।हरी मटर की बजती
Read Moreनन्हे हाथ में नीला बल्ला,आँखों में सपनों का हल्ला।सड़क बनी है आज मैदान,खेल रहा है छोटा शैतान।। बैटमैन वाली प्यारी
Read Moreपरीक्षा की घड़ी आई।सोचो बच्चो करो पढ़ाई।।सुबह-सुबह उठकर पढ़ना।मन को बिल्कुल नहीं टालना।।किताब हमारी सच्ची दोस्त।ज्ञान दिलाए हर दिन रोज़।।डर
Read Moreमम्मी, मैं तो जूस पिऊँगी,मुझे न अच्छे लगते फल।जल्दी है,पी रही जूस हूँ,छोड़ो, कल खा लूँगी फल। माँ भी समझ
Read Moreबचपन का राग, हँसी की बहार,फूलों सी खुशबू, रंगों की बौछार।नन्हे कदमों की दुनिया बड़ी,सपनों की पगडंडी, हर पल नई।
Read Moreस्वर्णा नदी का बहुत पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। यहाँ प्राचीनकाल से प्रति वर्ष मकर संक्रांति से लेकर वसंत पंचमी
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