बाल साहित्य

बाल कविता

नन्हा सिपाही

नन्हे हाथों में खिलौना,चेहरे पर मुस्कान।खेल-खेल में बनता बच्चा,प्यारा-सा कप्तान॥ कभी सिपाही बन जाता है,कभी बनता शेर।नन्ही आँखों में उसके,सपनों

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बाल कविता

बरखा रानी

विधा- गीतशीर्षक- बरखा रानी बरखा रानी आएगी,ढेरों खुशियां लाएगी,रिमझिम-रिमझिम बूंदों सेगीत सुरीला गाएगी। भीग-भीग पेड़ों के पत्ते,और हरे हो जाएंगे,ताल-तलैया

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बाल कविता

बाल गीत – मेला

मुझको बड़ा सुहाना लगता,कोई भी हो मेला,मेले में हो सजे-सजाए,लोगों का बस रेला। कुल्चे-छोले-रबड़ी-कुल्फी,खेल-खिलौने न्यारे,झूले-हाथी-ऊंट सवारी,मेले के खेल निराले। —

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बाल कविता

बाल कविता – तिरंगा प्यारा-प्यारा

तिरंगा प्यारा-प्यारा है,भारत देश हमारा है।केसरिया देता बलिदान,सफेद सिखाता शांति महान।हरा रंग खुशहाली लाए,नीला चक्र आगे बढ़ाए।पंद्रह अगस्त का दिन

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बाल कविता

नन्ही मुस्कान

नन्हे हाथों में सजे,सपनों के संसार।पापा संग मुस्कान यह,करती मन गुलज़ार॥ नटखट आँखें बोलतीं,भोले-भोले बोल।इनकी प्यारी शरारतें,मन में भरतीं घोल॥

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