बाल साहित्य

बाल कविता

हमें स्कूल लगता प्यारा

सुबह-सुबह सूरज मुस्काए ,आँगन में छाया उजियारा।बस्ता लेकर चल पड़ते हम, हमें स्कूल लगता प्यारा।ज्ञान की बातें, खेल निराले, मिलते

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बाल कविता

नन्हा हाथी वाला

नन्हे हाथों की खुशी,भोली-सी मुस्कान।हाथी संग खेला करे,मेरा नन्हा जान॥ पीला-नीला हाथिया,चलता धीरे-धीरे।हँसी बिखेरे आँगना,खुशियाँ घेरे-घिरे॥ धक्का देकर बोलता,“चल रे

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