मर्यादा, मानवता और मेधा का महागान : रामचरितमानस से कृत्रिम बुद्धिमत्ता को नैतिक निदान
मानव सभ्यता इस समय ऐसे युग से गुजर रही है जहाँ विज्ञान और तकनीक की प्रगति ने जीवन की दिशा
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Read Moreबिखरती मानवीय संवेदनाओं और बढ़ती दूरियों के बीच संग्रहालय साझा संस्कृति और इतिहास की सबसे सशक्त आवाज बनकर उभरे हैं।
Read Moreबिहार में कला की विरासत पुरानी तथा समृद्ध है इसकी संस्कृति भी प्राचीन तथा वैविध्यपूर्ण है। पुरातात्विक काल के उत्खनन
Read Moreवेद मनुष्य के रचे नहीं, परमेश्वर के ज्ञान हैं। आर्यसमाज की मान्य गणना के अनुसार विक्रम संवत् 2083 में सृष्टि
Read Moreवैश्विक स्तरपर पृथ्वी की इस अनंत और रहस्यमयी धरा पर यदि किसी देश को आध्यात्मिक चेतना,सर्वधर्म समभाव,मानव कल्याण और परमार्थ
Read Moreमानव शरीर को संतों ने नौ दरवाजों वाला नगर कहा है, और उसी नगर में एक ऐसा गुप्त द्वार बताया
Read Moreश्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने में, देख लो चाहे दिल के नगीने में. यह पक्तियाँ केवल एक भजन
Read Moreयोग एक प्राचीन भारतीय अनुशासन से विकसित होकर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ के एक शक्तिशाली साधन के रूप में उभरा
Read Moreकभी विचार करता हूँ कि क्यों एक राजकुमार घर छोड कर चल पडता है, कष्ट सहता है और बुद्ध बन
Read Moreअरबों वर्ष पुरानी इस धरती पर मानव भी करोड़ों वर्षों से रहता आ रहा है। हालाँकि मैं चचा डार्विन की
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