कविता- कवि कुछ ऐसा गान लिखो
कवि कुछ ऐसा गान लिखोकिअंतर्मन की चेतना जागृत हो,गूंज से दिगंत गुंजित हों,अन्तस् परिवर्तित हो,जीवन मोहक हो, रसवंत हो,अंतर्द्वंद्व-अंतर्कशाय विलुप्त
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Read Moreउन रंगीन महफ़िलों की नुमाइश! बनके रह गई औरत ।मिलती आज, हर गली- नुक्कड़ चौराहे पे तबायफ ।। मैं! पूछती
Read Moreक्लर्क प्रताप नारायण जाटव की मेज़ पर फ़ाइलें रुकती थीं — महीनों, सालों। पर वे रुकती तभी थीं जब लिफ़ाफ़ा
Read Moreवैश्विक स्तरपर हर वर्ष पूरी दुनियाँ में वर्ल्ड नों टोबैक्को अर्थात विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। हर वर्ष
Read Moreश्रम साधक का बहे पसीना।चाहे सुख से वो भी जीना।।करना चाहे सपने पूरे।जो भी अब तक रहे अधूरे।। श्रम साधक
Read Moreलोभ मोह में उलझा मानव, बनी हुई है पीर।कैसे कोई समझाए इनको, व्यर्थ बहाते नीर।। इस दुनिया की गजब कहानी,
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