कविता
जिंदगी की सारी मौज खत्म हुईअब जिंदगी शुरू हुईरास्ते का न कोई हमसफर, न कोई मंजिलएक राही की तरह अब
Read Moreरवि किरणों का ताप, धूप झुलसाती। पशु पक्षी बेहाल, प्यास तरसाती।। लू से बचना आप, छाँस हैं पीना। बरगद की
Read Moreनारी संस्कार बीज बोएगी, जब स्वयंसिद्धा हो जाएगी, मर्यादा की लक्ष्मण रेखा, आप ही खिंच जाएगी।। मर्यादा में रहें जब
Read Moreमैं हूँ स्त्री, मैं ही पुरुष, अर्द्धनारीश्वर की हूँ कृति,फिर क्यों जग के इस आँगन में, होती हमारी दुर्गति? हाँ
Read More21वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां
Read Moreआज के दौर में सुंदर दिखने की इच्छा केवल एक व्यक्तिगत पसंद नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक दबाव
Read Moreबारिश की बूंदों को जलाना आ गयाक्या कहें उनको भी हराना आ गयातीखे शब्द मेरे, पन्ने झेल नहीं पाए औरजेठ
Read More