Category : संस्मरण



  • मेरी कहानी 197

    मेरी कहानी 197

    ऐमरजैंसी वार्ड में मैं तीन दिन तीन रातें ऐसे ही पड़ा रहा, कोई हिलजुल नहीं थी, खाना तो दूर की बात, पानी पीने की इजाजत नहीं थी। मेरे लब और जीभ सूख रहे थे। नर्स को...


  • वह कौन थी ?-संस्मरण

    वह कौन थी ?-संस्मरण

    शनिवार का दिन था । मैं सुबह दस बजे कॉलेज के लिए अपने काइनेटिक हौंडा से निकली जैसे ही मैं मिनिस्टर रोड पहुंची एक मोटर साइकिल सवार बड़ी तीव्र गति से मेरे स्कूटर को टक्कर मार...

  • मेरी कहानी 196

    मेरी कहानी 196

    कुलवंत की इंडिया यात्रा के बाद ज़िन्दगी पहले की तरह चलने लगी। इंडिया रहकर जो जो काम हमने करने चाहे थे, वोह कुलवंत ने मुकमल कर दिए थे और हम बेफिक्र हो गए थे। दिन पहले...


  • मेरी कहानी 194

    मेरी कहानी 194

    बैनमर के कहने के मुताबिक वैस्ट पार्क अस्पताल से मुझे खत आ गया कि स्पीच थेरपी के लिए मैं वहां पहुंचू। मैं और कुलवंत अस्पताल जा पुँहचे। हम से पहले एक और पेशैंट था। जब उस...