संस्मरण

एक हैं अम्मा

अम्मा प्रणाम। जब तक तुम मेरे साथ रही तब तक मुझे मदर्स डे की जानकारी नहीं थी। तुमने  2010 में देह त्याग कर इस असार सन्सार को अलविदा कह दिया। दस वर्ष हो गए पर में अभी तक नहीं कह सका कि एक अम्मा थीं। मुझे महसूस होता है कि तुम अभी भी मेरे साथ ही […]

लेख संस्मरण

हिंदी साहित्य के तीन आधुनिक तराने !

संस्मरण में उद्धृत साहित्यिक व्यक्तित्वों को काफी-काफी बरस हो गए , जानते हुए ! यह अलग बात है, ‘पहचान’ पैमाना मृत्युपर्यंत भी लोकेटेड नहीं हो पाता !! खैर, तीनों से अच्छी जान-पहचान है, यही यहाँ कहना ज्यादा श्रेयस्कर , समीचीन और प्रासंगिक है !!! डॉ. रामधारी सिंह ‘दिवाकर’ मेरे सर और पश्चश: वरेण्य मित्र हैं, […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज – 15 : पफ 

एक मोटी सी, सुन्दर लड़की अपने कुत्ते को टहलाती मेरी नई कक्षा के सामने आ खड़ी हुई। दो मिनट  बाद उसने पीछे मुड़कर जोर से आवाज़ दी, ” एड्रियन ‘.  एड्रियन फिर भी न आया। वह झल्लाई और चिल्लाई, “यू वांट मी टू बॉक्स योर ईयर्स इन फ्रंट ऑफ़ योर न्यू टीचर?” ( तुम चाहते हो कि […]

संस्मरण

कोई तो मेरी देवकी मौसी के पुत्र ‘कृष्णा’ की सुधि लेने वाले होंगे !

भारत भर और संसार के सनातन धर्मावलंबियों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म दिवस ‘श्री कृष्ण जन्म अष्टमी’ के रूप में मनाये जाने की कई तरह की परंपरा है । पुराणों, महाभारत और कई टीकाओं में ऐसा वर्णन है । विज्ञान, साक्ष्य और प्रामाणिक मान्यताओं के तह में जाने पर काल-अवधारणा विषयक विसंगतियाँ हो सकती हैं, […]

विविध संस्मरण

एकसमय फ़िल्मों से संन्यास ले चुके ‘अमिताभ बच्चन’ को मेरे पत्र ने उबारे थे !

भारतीय फिल्मों के महानायक श्रीमान् अमिताभ बच्चन अपने व्यक्तित्वों और कृतित्वों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं. डेब्यू फिल्म में सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता और बुढ़ापे में भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता सहित 5वीं बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त करने हो ! बीबीसी से शताब्दी के महानायक घोषित किये जाने हो ! पद्म विभूषण […]

अन्य संस्मरण

कोरोना डायरी (कोरोना पर पहली डायरी)

दिसम्बर 2019 ●● मनुष्यों में जो रोगाणु और अब तो विषाणु एक-दूसरे-तीसरे-चौथे, फिर अनगिनत लोगों में प्रवेश कर दुनिया को हाहाकारी अवस्था में लाकर पटक दिए हैं, इस व्यथा-कथात्मक भ्रूण भले ही दशक पुरानी है, किंतु आरंभिक केस दिसम्बर 2019 में आयी, वो भी चीन के वुहान शहर से ! पता नहीं, चमगादड़ के जूठे […]

संस्मरण

संस्मरण : वो होस्टल के दिन

बात उन दिनों की है जब हम परास्नातक करने गोरखपुर विश्वविद्यालय में पहुँचे।दाखिला मिलने के बाद रहने की समस्या आयी तो विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास रानी लक्ष्मी बाई पहुँच गए।पर मैट्रन जी ने जगह नहीं है, कह कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। पढ़ाई तो करनी ही थी लिहाजा अपनी एक स्नातक करते समय की […]

संस्मरण

मेरी आदर्श माँ 

गौरेया इंसानों के साथ रहने वाला पक्षी वर्तमान में विलुप्ति की कगार पर जा पहुंचा है । ये छोटे -छोटे कीड़ों को खाकर प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में सहायक है । गोरैया के कम होने का कारण विकिरण का प्रभाव तो है ही इसके अलावा उनकी ओर इंसानों का ध्यान कम देना रहा। पाठ्यक्रमों […]

संस्मरण

स्वामी श्रद्धानन्द जी की पुत्र-वधु और पं. इन्द्र वाचस्पति जी की धर्मपत्नी माता चन्द्रावती जी

–स्मृतियों के झरोखे से- (निवेदनः श्रीमती दीप्ति रोहतगी, बरेली वेदभाष्यकार प्रवर विद्वान आचार्य डा. रामनाथ वेदालंकार जी की दौहित्री हैं। वह बचपन में अपने नाना आचार्य जी के साथ प्रायः गुरुकुल में ही रहा करती थीं। उन्होंने उन दिनों का स्वामी श्रद्धानन्द जी पुत्रवधु माता चन्द्रावती जी से जुड़ा अपनाएक प्रेरक प्रसंग वा संस्मरण प्रस्तुत […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज -14 : ईस्टर और मैं

इस देश में आई तो जनवरी का महीना था।  और दो महीने लगे घर ज़माने में।  एक कमरा और सांझी रसोई  . उसमे एक ही छोटी सी मेज़ जिसपर रोटी बेली जा सके। मैं अपना खाना बनाकर कमरे में ले जाती थी।  मकान मालकिन एक नाइजीरिया से आई नर्स थी। बेहद भली. . अक्सर मेरी देखभाल करती थी।  मई […]