Category : संस्मरण








  • संस्मरण – जंगल में मंगल

    संस्मरण – जंगल में मंगल

    एक उनींदी दोपहर में डायरी के पन्नों से एकाएक मेरा बचपन यादों की खिड़की से झाँककर मुस्कुराता है, और मैं भाव-विभोर हो एक आर्दृ हंसी हंसने लगती हूँ। बचपन के इस कोलाहल में झरनों का संगीत,...

  • विरहिन की गली मत जाना रे भौंरा

    विरहिन की गली मत जाना रे भौंरा

    जाफरी साहब…! हाँ….जाफरी साहब..यही नाम था उनका। बचपन की कुछ यादों के बीच जाफरी साहब भी स्मृतियों में अकसर आते रहते हैं। व्यक्तित्व आकर्षक…! गोरा-चिट्टा..लम्बा कद…लम्बी सफ़ेद दाढ़ी…आज भी याद है। वही जाफरी साहब कभी-कभी गोल...