बालोपयोगी लेख

समय से घर पहुँच जाना चाहिए

हमारे घर पापा मम्मी कालेज भेजते हैं तो हमें भी डर लगता है। अपने पापा मम्मी को छोड़कर जाना हमको अच्छा नहीं लगता। भीड़ में कोई गुंडा हमको मार न डाले और हमें नुकसान न पहुँचा दे, हमको इसका डर लगता है। हमें अपने पापा मम्मी को छोड़कर नहीं जाना चाहिए। जाना है तो अपने […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म बालोपयोगी लेख सामाजिक

सेवा परमो धर्मः सूत्र-वाक्य की परीक्षा

ओ३म् हमारे देश में कुछ वाक्य व सूत्र प्रचलित हो गये हैं जिनमें से एक सूत्र वाक्य है ‘सेवा परमो धर्मः’। इसका अर्थ सभी जानते हैं। इसके आधार पर सेवा ही परम धर्म है। पता नहीं यह शब्द व वाक्य कहां से आया है? यह वेद वाक्य तो कदापि नहीं हो सकता और न ही […]

बालोपयोगी लेख

स्कूल की छुट्टी

लो स्कूल की छुट्टी हुई अब घर जाएंगे। बहुत तेज भूख लगी है जो मम्मी ने बनाया वही खा लेंगे। टी वि का रिमोट मम्मी से छीन कर कार्टून फिल्म देखेंगे। कुछ देर रेस्ट कर के स्कूल से मिला होमवर्क पूरा कर लेगे। स्कूल की मैडम से मिले गुड स्टार को मम्मी को बताएंगे। मैडम […]

बालोपयोगी लेख

पेड़ की आत्मकथा

मैं एक पेड़ हूं. मगर, आत्मनिर्भर पेड़ हूं. अपना भोजन स्वयं बनाता हूं. क्या आप जानना चाहते हो कि यह कार्य मैं किस तरह करता हूं ? हां. तो चलिए, मैं बताता हूं. मैं किस तरह काम करता हूं. मेरे अंदर एक भोजन बनाने का कारखाना है. इस कारखाने का नाम हरितलवक है. यह कारखाना […]

बालोपयोगी लेख

बाल-साहित्य

बच्चों की आवश्यकताएँ  सर्वव्यापी है , जहाँ उन्हें ज्ञान देने की आवश्यकता है , वही उन्हें सम्मान देने की भी आवश्यकता हैं| उन्हें संस्कारी बनाना है तो उसे सुविचारी भी  बनाना है , उन्हें परम्परा और परिपाटी से परिचित   कराना है तो स्वयं करने और सीखने के मौके को  भी  दिये  जाना  हैं|  उनको विवेकशील  […]

बाल साहित्य बालोपयोगी लेख

क्यों होते हैं बच्चे निराश !

लेखक की बालमनोविज्ञान परक कृति क्यों बोलते हैं बच्चे झूठ से. क्यों होते हैं बच्चे निराश ! सामान्यतः माता-पिता और अध्यापकों को कहते सुना व देखा जाता है कि अमुक बच्चा कमजोर है। उसे कुछ नहीं आता सुस्त रहता है।अकेले गुमसुम बैठा रहता है जबकि वास्तविकता यह होती है कि बालक विभिन्न शरीरिक मानसिक कारणों […]

बालोपयोगी लेख सामाजिक

गिनतारा (अबेकस) बच्चों के मानसिक विकास का अद्भुत साधन 

आज कल हर माता पिता के लिए यह चिंता का विषय है कि उनका बच्चा पढ़ाई लिखाई में अव्वल हो, और यह कोई नई बात भी नहीं है, सदियों से ऐसा होता आया है, लेकिन जहाँ पहले मां बाप बच्चे के 10 या 10+2 कि पढ़ाई के समय ही ऐसा सोचते थे पर अब यह एक […]

बालोपयोगी लेख सामाजिक

सन्तानों को संस्कारवान बनाने पर विचार

ओ३म् आज का युग आधुनिक युग कहलाता है जहां क्या वृद्ध, क्या युवा और क्या बच्चे, सभी पाश्चात्य संस्कारों में दीक्षित हो रहे हैं। दूर के ढोल सुहावने की भांति बिना जाने समझे पाश्चात्य जीवन शैली उन्हें अच्छी लगती है और वेश-भूषा और विचार ही नहीं भाषा और भोजन आदि भी उनका बिगड़ रहा है […]

बालोपयोगी लेख

बालसाहित्य में विज्ञान लेखन

सृष्टि के सृजन के साथ-साथ सूर्य-चन्द्र तारे बनें चमके पेड़-पौधों का उद्भव हुआ मानव ने जन्म लेकर चलना फिरना घूमना सीखा अपने आस-पास को देखना समझना चाहा उसको अनुभव तर्क  और प्रयोगों से भलीभांति जानने के क्रम में वह कब ज्ञान से विज्ञान की ओर मुड़ गया पता ही चला। आज का युग पूर्णतया वैज्ञानिक […]

बालोपयोगी लेख

कथा भूकम्प की

बच्चों कई वर्ष पहले जब हम गणतंत्र दिवस मना रहे थे। उसी समय हमारे देश के पश्चिमी राज्य गुजरात में एक महा विनाषकारी घटना घटी जिसको भूकम्प कहा गया। क्या होता है कैसे आता है यह जानने की बाते हैं। पहले हम सब जब छोटे-छोटे थे तो एक दिन सुबह-सुबह दादी कह रही थीं बेटा-रात […]