एक कोना बचाए रखने की जरूरत है
मन के आंगन में,एक कोना शांत रहे,सपनों की छाँव। भीड़ के बीच भी,थोड़ी सी तन्हाई हो,खुद से मुलाकात। शोर से
Read Moreमन के आंगन में,एक कोना शांत रहे,सपनों की छाँव। भीड़ के बीच भी,थोड़ी सी तन्हाई हो,खुद से मुलाकात। शोर से
Read Moreवो धूप की किरणेंचेहरे पर गिरती हैं धीरेदिल में उजाला फैलता सड़क पर पाँव मेरेछोटी-छोटी खुशियाँहर कदम में उम्मीद साँसों
Read Moreचुप गलियां हैंहवा भी थमी सीकुछ तो हुआ सूनी राहेंकदमों की आहटकहाँ खो गई खिड़की उदासपरदे भी चुप हैंकिसका इंतज़ार
Read Moreसर्द हवाओं मेंकदम ढूँढते दीवारेंगुमान छुपा बैठा खिड़कियों के सायेसपनों की मूरत टूटतीखामोशी गाती पुराने फर्श की छाँवयादों के रंग
Read Moreचुप नदी बहतीशब्दों में न समाए भावहृदय फुसफुसाता पतझड़ की पत्तियाँभावनाएँ चुपचाप गिरेंअदृश्य पर गहरी सुबह की ओस चमकेआनंद के
Read Moreसन्नाटा गहरा,अनकहे भाव छुपाए हैं,मन बोले चुप। हवा के झोंके,कभी कहें तो कभी चुप,संदेश लाए। पानी की धारें,धीरे-धीरे बहती जाएं,शब्दों
Read Moreशीतल हवापत्तों की सरगम मेंमन मुस्काए नीला गगनसपनों को देता हैअनंत दिशा नदी की धुनबहती हुई कहतीछोड़ो विषाद हरी घास
Read Moreमाटी की रेखाचुपचाप खड़ी हूँसीमाओं के बीच धूप सहती हूँबरसात पीती हूँऋतुओं की सखी बीजों की आशामेरे संग पलतीहरियाली हँसे
Read Moreएक घाट का जलसबके अधरों परसमान प्यास धूप तपती हैछाँव बाँटती धरतीमिटे विभाजन माटी की खुशबूरोटी की गर्माहटसाझा धड़कन एक
Read Moreढलती धूप कहेपत्तों पर अंतिम स्पर्शसमय मुस्काए शाख से गिरकरपत्ता धरती से मिलेचक्र पूर्ण हुआ साँझ की निस्तब्धपगडंडी सुनसान हैकदम
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