Author: डॉ. अशोक कुमार शर्मा

हाइकु/सेदोका

पतों से हो गई है रिश्तों की उम्र

पतझड़ की हवा,रिश्तों के रंग उड़े,साँसें गुम हो गईं। सूखे पत्तों में,बीती यादें बिखरी हैं,हृदय रोता है। सन्नाटा छाया,बातें अधूरी

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हाइकु/सेदोका

खुशियां उमंग और उत्साह की पाकीज़गी है

सुबह की किरणओस में मुस्काननव जीवन जागे हल्की सी हवापत्तों की सरसरमन हो निर्मल नीला आकाशउम्मीद की उड़ानस्वप्न सजें मौन

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हाइकु/सेदोका

शिक्षक विश्वविद्यालय एक उम्मीद है

भोर की घंटीकक्षा में उजासप्रश्नों की धड़कनस्याही में सपनेकिताबों की सांसशिक्षक का मौनदिशा बन जातायुवा आंखों मेंभविष्य की लौतर्क की

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