जज़्बात को अल्फ़ाज़ न समझें
चुप नदी बहतीशब्दों में न समाए भावहृदय फुसफुसाता पतझड़ की पत्तियाँभावनाएँ चुपचाप गिरेंअदृश्य पर गहरी सुबह की ओस चमकेआनंद के
Read Moreचुप नदी बहतीशब्दों में न समाए भावहृदय फुसफुसाता पतझड़ की पत्तियाँभावनाएँ चुपचाप गिरेंअदृश्य पर गहरी सुबह की ओस चमकेआनंद के
Read Moreसन्नाटा गहरा,अनकहे भाव छुपाए हैं,मन बोले चुप। हवा के झोंके,कभी कहें तो कभी चुप,संदेश लाए। पानी की धारें,धीरे-धीरे बहती जाएं,शब्दों
Read Moreशीतल हवापत्तों की सरगम मेंमन मुस्काए नीला गगनसपनों को देता हैअनंत दिशा नदी की धुनबहती हुई कहतीछोड़ो विषाद हरी घास
Read Moreमाटी की रेखाचुपचाप खड़ी हूँसीमाओं के बीच धूप सहती हूँबरसात पीती हूँऋतुओं की सखी बीजों की आशामेरे संग पलतीहरियाली हँसे
Read Moreएक घाट का जलसबके अधरों परसमान प्यास धूप तपती हैछाँव बाँटती धरतीमिटे विभाजन माटी की खुशबूरोटी की गर्माहटसाझा धड़कन एक
Read Moreढलती धूप कहेपत्तों पर अंतिम स्पर्शसमय मुस्काए शाख से गिरकरपत्ता धरती से मिलेचक्र पूर्ण हुआ साँझ की निस्तब्धपगडंडी सुनसान हैकदम
Read Moreधूप की रेखाटूटी दीवारों परअब भी चमकती साँसों की लयशून्य में भी सुनाईधीमी पर दृढ़ सूखे पत्तेपांवों तले कहतेचलते रहो
Read Moreपतझड़ की हवा,रिश्तों के रंग उड़े,साँसें गुम हो गईं। सूखे पत्तों में,बीती यादें बिखरी हैं,हृदय रोता है। सन्नाटा छाया,बातें अधूरी
Read Moreपत्ते झरते हैंवायु में फुसफुसाहटमन खामोश है सागर की लहरेंचट्टानों से टकरातींगूंज उठती हैं अँधेरी रात मेंसुरज की लाल किरणरोशनी
Read Moreरात की खामोशीदिल की गहराई में गूंजतीअधूरी आस सन्नाटा बोलेछुपे सपनों की परतेंटूटते मन के रंग पवन की सरसराहटभूले हुए
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