वैमनस्य आख़िर क्यूँ
एक दौर था जब लोगों के दिल में रिश्तों की अहमियत हुआ करती थी, अपनों के बुरे वक्त पर दोस्त,
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Read Moreक्यूँ कुछ लोगों की नज़रों में गृहिणी की कोई कीमत नहीं होती, क्यूँ ऐसा लगता है कि औरतें घर पर
Read Moreकल (pediatrician) से मिलने बच्चों के अस्पताल जाना हुआ। आमतौर पर हम सालों से बच्चों को खिलौनों से खेलते देखते
Read Moreस्पर्श की भी एक भाषा होती है, स्पर्श से इंसान की नीयत का भी पता चल जाता है। कभी-कभी किसी
Read Moreभले आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हो पर हमारे समाज में महिला लेखिकाओं को बहुत सारी विडम्बनाओं
Read Moreइज्जत, शोहरत, चाहत, पैसा, नाम इनमें से कुछ भी पाना नामुमकिन नहीं। बशर्ते कुछ समय के लिए सब कुछ छोड़ने
Read Moreसुनो..!दुनिया वालों मुझे खुद को टटोलना है..! लगता है मुझमें बहुत बड़ी खोट है, या तो मैं तारीफ़ के काबिल
Read Moreमानवता धर्म है, भाईचारा धर्म है, प्रेम धर्म है परवाह धर्म है। पर आजकल धर्म की परिभाषा ही बदल गई
Read Moreसारे मेहमान मस्ती में झूमते मज़े ले रहे थे, पर शादी के शोर के बीच दुल्हन के भीतर ही सन्नाटा
Read Moreसमाज में चल रहे पाखंड को देखकर लगता है, क्या हम सच में इक्कीसवीं सदी के आधुनिक युग में जी
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