सोशल मीडिया की चकाचौंध
आज हर हाथ में स्मार्टफोन है, और हर आँख स्क्रीन पर टिकी हुई। फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टिकटॉक जैसे ऐप्स
Read Moreआज हर हाथ में स्मार्टफोन है, और हर आँख स्क्रीन पर टिकी हुई। फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टिकटॉक जैसे ऐप्स
Read Moreझांकते फ़िल्मी दुनिया के अनमोल गीतकारों को,जो अल्फ़ाज़ नहीं मुहब्बत की मिठास बुनते थे, यादों के झरोखों से झांकिए तो
Read Moreमानव सभ्यता के इतिहास में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं, जो हमेशा के लिए दर्ज हो जाती हैं। 17 दिसंबर,
Read Moreआंखों में साहिलों की तरह बेचैनियां रहीं,हाथों में इंतज़ार की बस बैसाखियां रहीं।उम्मीदें इधर उधर बस यूं ही भागती रहीं,मौजें
Read Moreउड़ जाएंगे चेहरे के हंसी रंग रफ़्ता रफ़्ता,अपनी सूरत पे नाहक़ नाज़ किया करता है।हम भी थे कभी हुस्नों जमाल
Read Moreकिताबें केवल काग़ज़ के पन्नों का ढेर नहीं होतीं। ये मानव के सदियों पुराने अनुभव, ज्ञान, आशाएँ और आँसुओं का
Read Moreजातिवाद और क़ौमवाद आज के भारतीय समाज के सामने खड़ी सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक हैं। सवाल यह है
Read Moreस्मिता पाटिल का अभिनय भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा अध्याय है जो यथार्थवाद, संवेदनशीलता और स्त्री-संघर्ष की अनकही
Read Moreदेवदार की बहती आँखें दर्द से कराह रहीं हैं,तनों पर ज़ख्म ख़ून की लकीरें बोल रही हैं।कुल्हाड़ियाँ सिर्फ लकड़ी नहीं
Read More1980 के दशक का सिनेमा अपने आप में एक सांस्कृतिक और सामाजिक घटना था। उस दौर में बड़े पर्दे पर
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