अलाव के गिर्द मीठी चाय की चुस्कियां
सर्दियों की वो प्यारी ठूंठरन अब कहाँ,वो लकड़ी के अलाव चिंगारियाँ कहाँ।सर्दियों की वो दिलकश गर्माहट कहां,अब वो गाँव के
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Read Moreसर्दियों की वो ठंडी सुबहें और शामें याद आती हैं जब धुंध की पतली चादर गाँव की गलियों पर उतर
Read Moreसारा ब्रह्मांड और समस्त मानव जीवन उसी एक सर्वशक्तिमान ईश्वर की अद्भुत रचना है, जिसे हम भाषा, धर्म और संस्कृति
Read Moreबेटियां परिवार की वह अमूल्य धरोहर होती हैं जो न केवल घर की ख़ूबसूरती और गरिमा बढ़ाती हैं, बल्कि समाज
Read Moreदिसंबर की ये सर्दी है मैं न कहता था,आ जाओ न क़रीब मैं न कहता था,नज़र को अपनी नज़र से
Read Moreसर्दियों का मौसम शरीर के लिए एक ऐसा समय होता है जब ठंड और सूखेपन के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक
Read Moreकुछ लोग अपनेचले जाते हैं।इतनी ख़ामोशी सेकि उनके जाने की आहट भीकानों तक नहीं पहुँचती। फिर हर रोज़मन यही सोचता
Read Moreगीत मुहब्बत का गाओ तो कोई बात बने ।जु़ल्फें चेहरे पर गिराओ तो कोई बात बने ।राज़ इस तरह दिल
Read Moreआए माहज़बी मेरे रूबरू कोई तो गजल मैं लिखूँ,गहराईयों को दिल की मेरे कोई छू ले तो गजल मैं लिखूँ,पी
Read Moreआपका सीनियर सिटीज़न बनना जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ अनुभवों की समृद्धि के साथ हम ज़िंदगी के अगले
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