लघुकथाएं
पिता ने कहा, “तू घर बैठ जा बेटा, लड़की को नौकरी करने दे। उसकी तनख्वाह ज़्यादा है।”बेटा चुप रहा। माँ
Read Moreनिर्बल को न सताइए,जाकी मोटी हाय, बिना जीव की श्वास से,लौह भस्म हो जाए। संत कबीर दास के इस दोहे
Read Moreना जाने क्यों, जब भी हरसिंगार की सुवास मेरी साँसों से टकराती है, मेरा मन खिंचा चला जाता है। यह
Read Moreट्यूशन से लौटकर आया हुआ रोहित घर में घुसते ही दादा जी से टकरा गया। दादा जी ने उसे रोककर
Read More“माँ जी ! आज त्यौहार है। घर में पकवान बने हैं। आप क्या खायेंगी- पूड़ी, कचौड़ी, पुलाव, खीर या कुछ
Read Moreगाँव में दो लड़कों का नाम, पिता का नाम और यहाँ तक कि गाँव का नाम भी एक ही था।अपराध
Read Moreमैंने मचल कर अपनी भाभी से कहा “भाभी प्लीज मुझे वो आपकी सेंडिल पहनने को दे दो ना, मेरे स्कूल
Read More“भतीजे की शादी में दस साल बाद गाँव लौटे रमन को अपना गाँव घर पहचान में ही नहीं आ रहा
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