आख़िरी चीख़
गाँव की पगडंडी पर शाम का अँधेरा उतर रहा था। खेतों से लौटते लोग अपनी-अपनी झोपड़ियों में जा चुके थे।
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Read Moreसुबह जब उसने फेसबुक खोला तो सामने आई पोस्ट देखकर हतप्रभ हो गया। ऐसा कैसे हो गया? अभी कल ही
Read Moreडा. सृष्टि अपने पति के कार से मंदिर जा रही थी, मंदिर के रास्ते में
Read Moreस्वतंत्रता दिवस का समारोह सम्पन्न हो गया। अगले दिन सुबह की सैर के लिये जाते हुये राजीव ने देखा कि
Read Moreगुलमर्र्ग की वादी उस रोज़ सफ़ेद मख़मली चादर में लिपटी थी। देवदार के ऊँचे पेड़ ठंडी हवा में झूम रहे
Read Moreसुबह के चार बजे थे। बाहर अभी भी अंधेरा पसरा था, मगर प्रियंका की नींद खुल चुकी थी। अलार्म बजने
Read Moreवृंदावन की संकरी गलियों में धूप आग उगल रही थी। मंदिर के सामने, आठ साल की गुड़िया माथे पर पसीना
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