नोट कहाँ कब बोलते, करते सिक्के शोर
नोट कहाँ कब बोलते, करते सिक्के शोर।केवल औछे लोग ही, दिखलाते हैं जोर।। धन-दौलत के मद फँसे, भूले सब व्यवहार,अहंकारों
Read Moreनोट कहाँ कब बोलते, करते सिक्के शोर।केवल औछे लोग ही, दिखलाते हैं जोर।। धन-दौलत के मद फँसे, भूले सब व्यवहार,अहंकारों
Read Moreपीट रहे जो छाती हरदम, इनकी कथा सुनाता हूं,मोदी का हौआ है कैसा….आज तुम्हे बतलाता हूं। पवन खेड़ा कुत्ते सा
Read Moreकाश दिखावे छोड़कर, समझें माँ के घाव,जीते जी ही दे सकें, उसको अपना ठाँव॥ मातृत्व दिवस पर करें, माँ का
Read Moreमेरे अक्षर लेखनी, दिल के सब जज़्बात।तुमसे मेरे बाद भी, रोज करेंगे बात॥ स्याही में भीगें हुए, मन के सब
Read Moreममता की छाँव में, मिलता जग का मान,माँ के चरणों में सदा, बसता है सम्मान॥ आँचल की उस ओट में,
Read Moreछपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार,अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई,
Read Moreजिनके पास हों एक से एक बढकरअत्यंत ही कुशल रणनीतिकारतब आगे भी ऐसे ही चमत्कारिकपरिणामों के लिए रहिये तैयार ।।
Read Moreझूठों के दरबार में, सच बैठा है मौन,घेरे घोर उदासियाँ, सुनता उसकी कौन॥ मंचों पर सच हारता, झूठ करे अभिनंदन,सिक्कों
Read Moreलगता खूब अजीब है, रिश्तों का संसार,अपने ही लटका रहे, गर्दन पर तलवार॥ चेहरों पर मुस्कान है, भीतर गहरा वार,मीठी
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