सीखो वृक्षों से अपनापन
सीखो वृक्षों से अपनापन, जीवन मधुरिम हो मनभावन।।मुस्काते सबके घर आँगन, लगते सबको बड़े सुहावन।। तन मन में हैं स्फूर्ति
Read Moreसीखो वृक्षों से अपनापन, जीवन मधुरिम हो मनभावन।।मुस्काते सबके घर आँगन, लगते सबको बड़े सुहावन।। तन मन में हैं स्फूर्ति
Read Moreसोच यही बस सब्र कर, मत कर मन संताप।सबको सब कुछ ना मिला, यही जगत का जाप।। अपनी-अपनी किस्मतें, अपने-अपने
Read Moreभक्ति की आँधी चली, डोला फिर इंसाफ।जेलों से भी लौटकर, मिलता वैभव-लाभ।। कल जिन पर आरोप थे, गूँजा था दरबार,आज
Read Moreपेट्रोलों के बढ़ गए, देखो फिर अब भाव।महँगाई की मार से, डगमग सबकी नाव।। ट्रैक्टर, बस, ट्रक सभी, माँग रहे
Read Moreरील-शोहरत का लगा, अब तो ऐसा रोग।लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।। लाइक-शेयर की भूख में, बेच रहे संस्कार,प्रसिद्धि की
Read Moreदेख सिकरी आगरा, ‘सौरभ’ है हैरान।खाली है दरबार सब, महल पड़े वीरान।। कल जिनके आदेश पर, झुकता था संसार,आज हवा
Read Moreलोगों का क्या? कहते कुछ भी, आगे बढ़ते जाना है।पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।नहीं किसी
Read Moreगर्मी आई गाँव में, तपने लगा जहान।मटके वाला जल बना, जैसे अमृत-दान।। सूरज बरसे आग-सा, झुलसे खेत-खलिहान,प्यासे पंछी ढूँढते, छाँव
Read Moreअमराई की छांव सुहानी, मनवा गीत सुनाए है,भीनी-भीनी खुशबू से, यह जीवन महकाए है। कोयल मीठी तान सुनाए, पवन रागिनी
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