परिपक्वता का सन्देश क्या है
ओस से भीगी सुबह,काँपता पत्ता मुस्काए,हवा थाम लेती है। चुप्पी की गोद में,शब्द अपने आप झुकें,आँखें सच पढ़ लें। कठोर
Read Moreओस से भीगी सुबह,काँपता पत्ता मुस्काए,हवा थाम लेती है। चुप्पी की गोद में,शब्द अपने आप झुकें,आँखें सच पढ़ लें। कठोर
Read Moreसुबह की किरणओस में मुस्काननव जीवन जागे हल्की सी हवापत्तों की सरसरमन हो निर्मल नीला आकाशउम्मीद की उड़ानस्वप्न सजें मौन
Read Moreभोर की घंटीकक्षा में उजासप्रश्नों की धड़कनस्याही में सपनेकिताबों की सांसशिक्षक का मौनदिशा बन जातायुवा आंखों मेंभविष्य की लौतर्क की
Read Moreराह में पत्थरकदम ठिठके पल भरहौसला आगे अंधेरी रातदीपक खुद बनना हैसूरज भीतर टूटी उम्मीदफिर भी बीज बोनाकल की खातिर
Read Moreझुका हुआ वृक्षफल से भरी डालियों मेंआभार बोलता है नदी का पानीनीचे बहते हुए भीसमुद्र रचता है माटी की खुशबूपाँव
Read Moreजरूरतें बोलींरोटी पहले चाहिएसपने बाद में जिम्मेदारियांकंधों पर चुपचापवक्त का बोझ ख्वाहिशें हँसींआंखों में रंग भरउड़ना चाहा थाली में सादामन
Read Moreजन की आवाज़ उठे,सत्य और न्याय का दीप,अंधकार मिटे। कानून का बंधन,सबके लिए समान राह,धर्म का संकल्प। सुरक्षित मन और,स्वतंत्र
Read Moreधूप उधार लोतो छाँव भी माँगेअपनी नहीं लगती कर्ज़ की तलवारचमकती है पल भरहाथ ही काटे उधार का साहसभीतर से
Read Moreअनुभव बोलते हैंमौन में भी अर्थ भरतेजीवन समझाते ठोकरें राह कीचलना हमें सिखलातींआँखें खोल जातीं कठिन क्षणों मेंमन का दीपक
Read Moreसूनी मेज़ परहवा पलटती पन्नेस्याही ठिठकी चाय की भाप मेंअधूरे वाक्य तैरेंशाम धीमी खिड़की के बाहरपीपल की पत्तीसुनती शब्द काग़ज़
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