बाल साहित्य

बाल कविता

बुनकर बया सीख सिखलाती

बुनकर बया सीख सिखलाती।स्वच्छ रखें घर पाठ पढ़ाती।। तिनका – तिनका जोड़ बनाए।लिए स्वच्छता नीड़ सजाए।।यही सत्य सबको बतलाती।बुनकर बया

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बाल कविता

बाल कविता — बचपन की मुस्कान

तीनों बैठे साथ में, चेहरे पर मुस्कान।खेल-खेल में बाँटते, खुशियों की सौगात॥ नन्हे-नन्हे हाथ हैं, नन्हे-नन्हे पाँव।इनसे ही खिलता रहे,

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बाल कविता

बाल कविता – गणपति बप्पा

गणपति बप्पा आए रे,खुशियों के रंग लाए रे।नन्हे-मुन्ने फूल सजाएँ,मिलकर मंगल गीत सुनाएँ।माथे चमके मुकुट सुहाना,प्यारा मुखड़ा बड़ा सलोना।बड़े-बड़े हैं

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बाल कविता – नंद के घर कान्हा आए

नंद के घर कान्हा आए,संग में खुशियाँ खूब लाए।मैया यशोदा हँसती जाए,माखन मिश्री उन्हें खिलाए।नन्हे कान्हा प्यारे-प्यारे,सबके मन को लगते

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बाल कविता

नन्हा सपना

नन्हे हाथों में किताब,आँखों में मुस्कान।पढ़-लिखकर तू एक दिन,बढ़ाना अपना मान।। खेलो-कूदो, पढ़ो खूब,करना अच्छे काम।मेहनत करके एक दिन,रोशन करना

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बाल कविता

बाल कविता – चिड़िया

फुदक-फुदक कर नाचती चिड़िया,दाना चुंगकर उड़ जाती चिड़िया |हरी-भरी सुंदर बगिया में,मीठे-मीठे गीत सुनाती चिड़िया |अपने मिश्रीघुले बोलों सेबच्चों का

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बाल कविता

नन्हा सिपाही

नन्हे हाथों में खिलौना,चेहरे पर मुस्कान।खेल-खेल में बनता बच्चा,प्यारा-सा कप्तान॥ कभी सिपाही बन जाता है,कभी बनता शेर।नन्ही आँखों में उसके,सपनों

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