बाल साहित्य

बाल कविता

बाल कविता – पिचकारी

मम्मी ला देना पिचकारी,रंगबिरंगी प्यारी-प्यारी,मैं भी होली खेलूंगा जम के,रंगों की कर लूंगा तैयारी। टोली बनाकर हम निकलेंगे,रंग लगाएंगे झूमेंगे,पिचकारी

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बाल कविता

दादा जी का पोता

पोता प्यारा दादा जी का,बैठे उनके पास।दिनभर उनसे बातें करता,हँसता बारह मास। दादा जी जब बाहर जाते,पीछे-पीछे जाता।छोटी-छोटी प्यारी बातें,सबको

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बाल कविता

पिज़्ज़ा और बर्गर की लड़ाई

एक बार सुबह-सुबहपिज़्ज़ा, बर्गर में हुई लड़ाई पिज़्ज़ा बोला–मुझको जो खाता है,वह मेरा गुण गाता है। बर्गर तुनककर बोला–तुझसे ज्यादा

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