मुस्कान आधार पर खिलती है
संतुलन समझ गतिविधि विचार, की पूर्ण चाँदनी खिलती है |भावों के गहन सिंधु में तब,उत्ताल तरंगे उठती है | पाना
Read Moreसंतुलन समझ गतिविधि विचार, की पूर्ण चाँदनी खिलती है |भावों के गहन सिंधु में तब,उत्ताल तरंगे उठती है | पाना
Read Moreजलवायु परिवर्तन से जनजीवन प्रभावित हुआ,यूँ कुदरती आपदाएं बढीं जीवन विखंडित हुआ।आकाशीय बिजली गिरने से हो रहीं खूब मौतें,खुले में
Read Moreकोई हार, कोई जीत नहीं है गले लगाकर, है ठुकराया, यह तो प्रेम की रीत नहीं है। प्रेम मिलन जब
Read Moreनहीं किसी से स्वयं डरो नहीं किसी से प्रेम की चाहत, नहीं किसी से प्रेम करो। नहीं किसी को कभी
Read Moreखुद ही, खुद से प्रेम करो। खुद ही, खुद को समय निकालो, खुद ही खुद के कष्ट हरो। नहीं, प्रेम
Read Moreसूरज आँखें दिखा रहा हैधरती से नाराज बड़ा। सिमट गई है छाँवपेड़ के पाँव तलेमुरझाए हैं गाँवतपन के दाँव चलेकंकड़
Read Moreभारत मां का रूप निराला, आभा इसकी निराली है।बर्फ से ढके पहाड़ इस के, नदियों से हरियाली है। किसान करते
Read Moreप्रेम दिखावा मात्र, छल कपटी इंसान है यहाॅं।संस्कार सब भूल रहे, नहीं धर्म ईमान है यहाॅं।मानव रहा कहाॅं? अब दानव
Read Moreसम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान से, सम्यक चरित्र जो पाता है। पाकर स्वयं पर विजय वर्धमान, महावीर बन जाता है।। अनंत
Read Moreकुछ उसने जाना है, कुछ मैंने जाना है।जीवन को जीने का, बस एक बहाना है।। कुछ अच्छा करने को, सब
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